यहां नकली डिग्री पर सालों से असली नौकरी कर रहे शिक्षक, जांच में इस तरह खुली पोल
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अमान्य और फर्जी प्रमाणपत्रों के माध्यम से नौकरी पाने वाले शिक्षकों की फेहरिस्त में तीन और नाम जुड़ गए हैं। तीनों शिक्षक हरिद्वार में तैनात हैं। एक इंटर कॉलेज में सहायक शिक्षक है, जबकि दो प्राथमिक विद्यालयों में सहायक शिक्षक के पद पर तैनात हैं।
इनमें से एक शिक्षक के बीए और एमए के प्रमाणपत्र फर्जी निकले हैं तो अन्य दो शिक्षकों ने फर्जी मूल और जाति निवास प्रमाणपत्र जमा कराए थे। इन तीनों के साथ अब तक 60 शिक्षकों के खिलाफ शिकंजा कसा जा चुका है।
बता दें कि गत वर्ष अमर उजाला ने फर्जी डिग्री, असली नौकरी अभियान के जरिये इस मामले का खुलासा किया था। इसके बाद सरकार ने शिक्षकों के प्रमाणपत्र की जांच को एसपी सीबीसीआईडी श्वेता चौबे के नेतृत्व में एसआईटी गठित की थी।
सैकड़ों शिक्षकों के प्रमाणपत्रों की जांच हो चुकी है और अब तक 60 शिक्षकों के विभिन्न प्रमाणपत्र फर्जी पाए गए हैं। इनमें से 22 शिक्षकों के खिलाफ मुकदमे भी दर्ज हो चुके हैं। एसपी श्वेता चौबे ने बताया कि बृहस्पतिवार को तीन और शिक्षकों के प्रमाणपत्रों की जांच पूरी हुई है। तीनों शिक्षक हरिद्वार जनपद में तैनात हैं। तीनों के खिलाफ विभागीय और विधिक कार्रवाई की संस्तुति कर दी गई है।
लखनऊ विवि की फर्जी डिग्रियां
राजकीय इंटर कॉलेज मंगलौर हरिद्वार में तैनात सहायक शिक्षक उपेंद्र कुमार ने वर्ष 2004 में नौकरी हासिल की थी। नौकरी के समय उसने खुद को 1999 में लखनऊ विवि से बीए और 2002 में एमए दर्शाया था। वर्तमान में चल रही जांच के दौरान पाया गया कि उसकी दोनों डिग्रियां ही फर्जी हैं। विवि प्रशासन की ओर से पता चला कि उपेंद्र नाम का कोई छात्र उक्त वर्षों में विवि में पढ़ा ही नहीं है।
दूसरे के मूल निवास प्रमाणपत्र पर लगाया अपना नाम
राजकीय प्राथमिक विद्यालय महमूदपुर रुड़की हरिद्वार में तैनात सहायक शिक्षक सुदेश कुमार ने भी साल 2004 में नौकरी पाई थी। उन्होंने खुद को गोविंदपुरी हरिद्वार का निवासी दर्शाते हुए मूल निवास प्रमाणपत्र कार्यालय में जमा कराया। अब जांच के दौरान एसआईटी को पता चला कि जिस क्रमांक का मूल निवास प्रमाणपत्र सुदेश कुमार ने जमा किया है वह ज्वालापुर के किसी हरिश्चंद्र का है।
शादी के बाद बनाया फर्जी जाति प्रमाणपत्र
राजकीय प्राथमिक विद्यालय लालढांग में सहायक शिक्षक मनोरमा सुयाल का जाति प्रमाणपत्र फर्जी पाया गया है। जांच में पता चला है कि वे सामान्य जाति की महिला हैं, जबकि उन्होंने अनुसूचित जाति का प्रमाणपत्र शिक्षा विभाग में प्रस्तुत किया है। जांच में यह भी आया कि उन्होंने शादी अनुसूचित जाति के परिवार में की थी, मगर प्रमाणपत्र बनवाते हुए उन्होंने कई तथ्यों को छुपाया।