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विभाग ने मानी गलती, गुरुजी चढ़ेंगे पहाड़
बिशन सिंह बोरा/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Sun, 05 Jan 2014 11:53 AM IST
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प्रमोशन के बाद दुर्गम तबादले को संशोधित करा देहरादून पहुंचे 17 शिक्षकों को पहाड़ चढ़ना ही पड़ेगा।
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विभाग ने इस तबादलों में गलती को स्वीकार करते हुए निरस्त कर दिया है। तीन जनवरी को अमर उजाला में इस मामले का खुलासा होने के बाद विभाग में हड़कंप मचा हुआ था। इनके अलावा मनमाने तबादले हासिल करने वाले शिक्षकों पर भी कार्रवाई हो सकती है।
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यह मामला साबित करता है कि पारदर्शिता के दावों के बावजूद शिक्षकों के तबादलों में जमकर खेल चल रहा है। विभाग ने करीब एक महीने पहले 1382 शिक्षकों का प्रमोशन के साथ तबादला किया था।
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इनमें से 153 शिक्षकों ने अपनी पहुंच का इस्तेमाल करते हुए दुर्गम तबादलों को संशोधित करा सुगम करा लिया था। 17 शिक्षक एससीईआरटी देहरादून में तबादला करवाने में सफल रहे थे। शिक्षा महानिदेशक राधिका झा ने छुट्टी से लौटते ही इन 17 शिक्षकों के तबादले निरस्त कर दिए हैं।
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गलत तबादले हुए थे, जिन्हें निरस्त कर दिया गया है, जब ये तबादले हुए उस दौरान मैं छुट्टी पर थी। अन्य संशोधित हुए तबादलों की भी जांच की जा रही है। तबादले गलत पाए गए तो निरस्त किए जाएंगे।
- राधिका झा, शिक्षा महानिदेशक
हर बार बच जाते हैं अधिकारी
शिक्षा विभाग में तबादलों में अंधेर के बावजूद केवल शिक्षकों के तबादले निरस्त करने तक की कार्रवाई होती आई है। ऐसे मामलों में दोषी अधिकारी हमेशा अपनी गर्दन बचाते आए हैं। इससे साफ है कि पूरे प्रकरण में नीचे से लेकर ऊपर तक मिलीभगत है।
प्रवक्ता के पद ही नहीं
सूत्रों की मानें तो एससीईआरटी के नए ढांचे में प्रवक्ताओं का पद नहीं है। इसके बावजूद तबादलों की संशोधित सूची जारी कर दी गई।
इन शिक्षकों को ज्वाइन कराने के लिए खूब दबाव बनाया गया। तबादलों में हुआ खेल खुला तो विभागीय अधिकारी अब अपनी गर्दन बचाने के लिए केंद्र से एससीईआरटी के लिए बजट न मिलने की बात कह रहे हैं।
एससीईआरटी के लिए केंद्र से 75 फीसदी बजट दिया जाता है, वहां शिक्षकों के पद हैं, लेकिन बजट नहीं है, यही वजह है कि शिक्षकों के तबादले निरस्त किए गए हैं।
- चंद्र सिंह ग्वाल, शिक्षा निदेशक
तबादले संशोधित कराकर एससीईआरटी पहुंचने वाले शिक्षकों को ज्वाइनिंग नहीं दी गई, इन शिक्षकों को ज्वाइनिंग देने से साफ मना कर दिया गया है।
- एसके शील, अपर शिक्षा निदेशक एससीईआरटी