पति की मौत के बाद भी नहीं हुआ तबादला
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बीमार पति की देखभाल के लिए पिछले सात साल से मंत्रियों के चक्कर काट रही शिक्षका के पति की बीते दिनों मौत हो गई। लेकिन दून निवासी शिक्षिका का रुद्रप्रयाग से दून तबादला नहीं हो पाया।
लकवा, ब्रेन सर्जरी और हार्ट अटैक झेल चुके गंभीर बीमार पति की देखभाल के लिए दून निवासी शिक्षिका रुद्रप्रयाग से दून अपना तबादला चाहती थी।
शिक्षिका की बेटी नेहा कहती है कि बिना सिफारिश वालों का विभाग में कोई पूछने वाला नहीं है। राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय छिनका जनपद रुद्रप्रयाग में सहायक अध्यापिका जगतेश्वरी बहुगुणा के पति भाष्करानंद बहुगुणा विशेष अभिसूचना विभाग देहरादून में कार्यरत थे। 25 जनवरी 2010 को ड्यूटी के दौरान उन्हें साइटिक का अटैक पड़ा।
इससे उनका बायीं तरफ का हाथ, पैर और चेहरा सुन्न हो गया। उनके पति की स्थिति इतनी बिगड़ चुकी थी कि वह अवशिष्ट त्यागने के लिए बिस्तर से उठने की स्थिति में नहीं थे।
18 साल की सेवा के बावजूद नहीं हुअा तबादला:
जगतेश्वरी पति की देखभाल के लिए रुद्रप्रयाग से देहरादून तबादला चाहती थी, लेकिन रुद्रप्रयाग जिले में उनकी 18 साल की सेवा के बावजूद उसका दून तबादला नहीं हो पाया।
दून तबादले के लिए वह विभागीय अधिकारियों, मंत्रियों और मुख्यमंत्रियों के चक्कर काटती रह गई। 16 जनवरी 2014 को मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने शिक्षिका के दून तबादले और आर्थिक सहायता की घोषणा की।
पूर्व सीएम की घोषणा के बाद शिक्षिका को आर्थिक सहायता मिली, लेकिन पति की देखभाल के लिए दून में तबादला नहीं हो पाया।
जगतेश्वरी के लिए नियम भी धरे रह गए:
जगतेश्वरी का तबादला नियमावली के नियम 29 (1) के तहत हो सकता था। उसी की तरह प्रदेश के अन्य शिक्षक और शिक्षिकाओं ने इसके लिए विभाग में आवेदन किया हुआ है, लेकिन शिक्षा सत्र 2015-16 समाप्त होने को मुश्किल से 18 दिन बचे हैं, इसके बावजूद, इस नियम के तहत शिक्षकों के तबादले नहीं हो पाए। इस नियम के तहत तबादलों की सूची शासन की फाइल में ही उलझकर रह गई।
पहुंच वालों के लिए नहीं है कोई नियम:
इस शिक्षा सत्र में ऊंची पहुंच वाले शिक्षकों के नियमों को ताक पर रखकर तबादले हुए। इन तबादलों का शिक्षक संगठनों की ओर से विरोध हुआ। बावजूद तबादले निरस्त नहीं हुए। वहीं जिनकी सिफारिश नहीं है, वे शिक्षक तबादलों के लिए चक्कर ही काटते रह गए।