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इन मैडम के पढ़ाने के कायल हैं बच्चे, अंदाज के बारे में जानेंगे तो आप भी करने लगेंगे फॉलो

Tue, 26 Dec 2017 02:12 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बागेश्वर
ब्यूरो/अमर उजाला, बागेश्वर Updated Tue, 26 Dec 2017 02:12 PM IST
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teacher teaches children a special way in Bageshwar
- फोटो : demo pic

जहां बच्चे आज की ‌तार‌ीख में पढ़ाई से भागते हैं वहीं इन मैडम के पढ़ाने का स्टा‌‌‌‌इ्ल बच्चों को बेहद पसंद अा रहा रहा। जान‌िए ऐसा क्या करती हैं ये मैडम..

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संसाधनों की कमी का रोना रोकर कुछ प्राथमिक स्कूलों में ताले लटका दिए गए हैं तो कुछ स्कूल ऐसे भी हैं जो केवल और केवल शिक्षकों के प्रयासों से बंद होने से बचे हैं और यहां छात्र संख्या भी निरंतर बढ़ रही है। ऐसा ही एक स्कूल है राजकीय प्राथमिक विद्यालय कन्यालीकोट। यहां की प्रधानाध्यापिका दूसरे स्कूलों को आइना दिखा रही हैं।
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पढ़ाई के साथ व्यक्तित्व विकास के लिए विभिन्न तरह के आयोजन, कमजोर बच्चों को अतिरिक्त समय देने के साथ ही अपने व्यवहार से उन्होंने स्कूल की सूरत बदल दी है। यही वजह है कि इस स्कूल में छात्रसंख्या 12 से बढ़कर 38 हो गई है।
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विकास खंड कपकोट के राजकीय प्राथमिक स्कूल कन्यालीकोट में कार्यरत प्रधानाध्यापिका रमा पाठक ने स्कूल में 2013 में कार्यभार ग्रहण किया। तब पाठशाला में सिर्फ 12 बच्चे पंजीकृत थे। लोग बच्चों की पढ़ाई के लिए पलायन करने की सोचने लगे थे, लेकिन रमा पाठक ने लोगों में भरोसा जगाया। उनकी बातों पर यकीन करके कई अभिभावकों ने पाठशाला में अपने बच्चों का पंजीयन कराया।

हर तरह से बच्चों को कुशल बनाने के लिए रहती हैं तैयार

teacher teaches children a special way in Bageshwar
रमा पाठक

उन्होंने स्कूल गतिविधियों, अभिभावक संपर्क, सामान्य ज्ञान, भाषण, निबंध प्रतियोगिता, शिक्षाप्रद सांस्कृतिक कार्यक्रम, शैक्षिक भ्रमण समेत कई अन्य कार्यक्रमों के जरिये बच्चों की प्रतिभा को उभारा। वह बच्चों से दीवार पत्रिका और किचन गार्डन भी तैयार करवाती हैं।

बच्चे उनसे खासे प्रभावित रहते हैं। इसी के चलते उनमें अनुशासन का भाव भी आ गया है। रमा पाठक खुद आधा घंटा पहले स्कूल पहुंच जाती हैं। छुट्टी के बाद भी वह कमजोर बच्चों को पढ़ाई में मदद के लिए अतिरिक्त समय देती हैं।

प्रधानाध्यापिका की कड़ी मेहनत से पाठशाला के शैक्षिक स्तर में बहुत सुधार हुआ है। शिक्षक वर्ग का विश्वास जीतने में भी प्रधानाध्यापिका सफल रही हैं। उनके सहयोग से पाठशाला में पीने का पानी, हाइटेक शौचालय और जीर्ण-शीर्ण कक्षा कक्षों का जीर्णोद्धार करवाया।

ग्रामीण भी उनकी तारीफ करते नहीं थकते। उन्होंने शासन और शिक्षा विभाग से प्रधानाध्यापिका को राज्यपाल शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित करने की मांग की है।

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