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मैदानी शिक्षक ने दुर्गम में काटी पूरी नौकरी
लक्ष्मी प्रसाद कुमेड़ी/ अमर उजाला, कर्णप्रयाग
Updated Fri, 13 Feb 2015 09:54 AM IST
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शिक्षा महकमे में जहां सुगम विद्यालयों में तैनाती के लिए तिकड़मबाजी आम बात हो गई है, वहीं कुछ ऐसे शिक्षक भी हैं जो पहाड़ के दुर्गम इलाकों में स्थित विद्यालयों में काम करते हुए ही सेवानिवृत्त हो गए।
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शिक्षक कालू सिंह गैरसैंण ब्लाक के अतिदुर्गम विद्यालय निगलानी से 31 जनवरी को सेवानिवृत्त हुए। उनका कभी सुगम में तबादला नहीं किया गया। मुजफ्फरनगर निवासी कालू सिंह की तैनाती वर्ष 1985 में चमोली जिले के कर्णप्रयाग ब्लाक स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय कांडा में हुई।
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बदरीनाथ हाईवे से 5 किमी की खड़ी चढ़ाई पर स्थित गांव कांडा दुर्गम में है और रास्ते भी बदहाल हैं। कालू सिंह ने यहां 25 साल तक सेवाएं दीं। कालू सिंह वर्ष 2009 में पदोन्नति पर गैरसैंण ब्लाक में चले गए, लेकिन यहां भी अतिदुर्गम राजकीय प्राथमिक विद्यालय निगलानी में ही तैनाती मिली।
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कालू सिंह ने इसे भी अपनाया और छह साल तक यहां सेवाएं देकर 31 जनवरी 2015 को सेवानिवृत्त हुए। कालू सिंह के काम और बच्चों से आत्मीयता को देखते हुए ग्रामीणों ने बुधवार को शिक्षक को सम्मानित भी किया।
कालू सिंह की मानें तो उन्होंने कभी दुर्गम और सुगम में फर्क नहीं समझा। काम को जिम्मेदारी मानते हुए सेवाएं दीं। सेवाकाल के दौरान कालू सिंह ने सुगम में जाने के लिए आवेदन किए, पर वे स्वीकार नहीं किए गए।
तैनाती के समय से ही शिक्षक कालू सिंह का बच्चों और अभिभावकों के साथ आत्मीयता का संबंध रहा है, जिन दुर्गम स्थानों पर प्रदेश के शिक्षक नहीं रहना चाहते उन विद्यालयों में उत्तर प्रदेश के शिक्षक कालू सिंह ने अपना पूरा जीवन बिताया है।
- राम सिंह बिष्ट प्रधान कोठा