उत्तराखंड के CM को इस अफसर ने दी मात
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मुख्यमंत्री किसी की तैनाती को रोके और वह उसी पद पर काबिज हो जाए ऐसा उत्तराखंड में ही मुमकिन है।
सरकारी सिस्टम की ढिलाई से विवादों में घिरे अफसर टीबी सिंह अपनी मनचाही जगह तैनात होने में कामयाब हो गए हैं।
दरअसल, चर्चा में रहे टीबी सिंह की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में मुख्य पर्यावरण अधिकारी के पद पर प्राविजनल तौर पर तैनाती का आदेश देते हुए इस मामले में सरकार से छह हफ्ते के भीतर जवाब मांगा है।
मुख्य पर्यावरण अधिकारी के पद पर रहे हैं तैनात
रोचक बात यह है कि हाईकोर्ट ने इस मामले में राज्य सरकार से एक दिन के भीतर जवाब मांगा था जिसे किसी ने दिया ही नहीं।
उल्लेखनीय है कि सिंह अप्रैल 2005 से मई 2008 तक उत्तराखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में मुख्य पर्यावरण अधिकारी रहे हैं।
टीबी सिंह हिमाचल प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से उत्तराखंड में प्रतिनियुक्ति पर आने के लिए प्रयासरत थे।
दरअसल, सितंबर 2013 में तत्कालीन सीएम विजय बहुगुणा ने टीबी सिंह को बोर्ड में एक साल की प्रतिनियुक्ति पर तैनाती के आदेश दिए थे।
सरकार से छह सप्ताह के भीतर जवाब मांगा
10 सितंबर, 2013 को अमर उजाला ने इसका खुलासा किया। इसके बाद सीएम ने प्रतिनियुक्ति के आदेश को 19 सितंबर 2013 को स्टे कर दिया, लेकिन आदेश निरस्त नहीं किया।
विगत दो जुलाई को टीबी सिंह ने हाई कोर्ट में कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश वीके बिष्ट की खंडपीठ में याचिका दायर की। कोर्ट ने नोटिस जारी कर शासन एक दिन के भीतर जवाब मांगा। लेकिन जवाब दाखिल नहीं हुआ।
उच्च न्यायालय ने चार जुलाई को टीबी सिंह के पक्ष में निर्णय दे दिया। सीएम द्वारा उनकी तैनाती को स्टे करने वाले आदेश को निरस्त करते हुए सरकार से छह सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है।
कोर्ट ने सिंह को बोर्ड में प्रॉविजनल ज्वाइनिंग कराने के आदेश भी दिए।
एन रविशंकर ने की थी जांच
नौ मई 2007 में तत्कालीन प्रमुख सचिव वन एवं पर्यावरण एन रविशंकर ने जांच कर तत्कालीन सीएम से टीबी सिंह को हटाने की सिफारिश की।
इसके बाद कई स्तर पर जांच रिपोर्ट लंबित होने केकारण विलंब हुआ। इसी बीच 2008 मई में सिंह की प्रतिनियुक्ति का समय समाप्त हो गया और उन्हें सरकार ने रिलीव कर दिया।
ये हैं टीबी सिंह से जुड़े मामले
- 2007 में कोरस इंडिया लि. की पत्रावली में गड़बड़ी व अफसरों को गुमराह करने पर प्रतिकूल प्रविष्टि।
- 2007 में बाजपुर के एक पेपर मिल व अमन मैटल फिनीसर्स हरिद्वार के मामले में स्पष्टीकरण लिया गया।
- 2007 को आदि गोल्ड माइन की पत्रावली में गड़बड़ी पर प्रतिकूल प्रविष्टि।
यह मामला मेरे संज्ञान में आया है, उच्च न्यायालय में समय से जवाब दाखिल नहीं हुआ। यह गंभीर मामला है। लेकिन सरकार न्यायालय के इस फैसले को चुनौती देगी। इसकी तैयारी भी हो रही है।
- सुभाष कुमार, मुख्य सचिव