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हो गया समझौता, टैक्सी हड़ताल हुई समाप्त

Sat, 10 Jan 2015 03:11 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून Updated Sat, 10 Jan 2015 03:11 PM IST
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taxi strike may end on Saturday.
तीन दिन से पहाड़ पर चल रही टैक्सियों की हड़ताल आज शनिवार समाप्त हो गई। शासन से सकारात्मक बातचीत और अधिकांश मांगों पर जारी शासनादेश को देखते हुए टैक्सी-मैक्सी कैब संचालकों ने तीन दिनों से चली आ रही हड़ताल खत्म कर दी।
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इन पर बनी बात
निजी वाहन अब सरकारी विभागों में ठेके पर नहीं चलेंगे, इसके लिए आरटीओ को आदेश कर दिए गए हैं।
वाहनों की सीटिंग क्षमता और आयु सीमा बढ़ाने के लिए एक कमेटी गठित कर दी गई है, जो 15 दिन में रिपोर्ट देगी।
हर जिले में ड्राइविंग लाइसेंस नवीनीकरण के लिए विशेष कैंप आयोजित किए जाएंगे।
उत्तराखंड परिवहन नियम 71 का अध्ययन कर जरूरी कार्रवाई की जाएगी।

शासन की पहल का दिखा असर

taxi strike may end on Saturday.

टैक्सी हड़ताल पर शुक्रवार को यूनियन और शासन के बीच हुई वार्ता में एक बार फिर सभी मांगों पर विचार विमर्श हुआ। यूनियन ने जिन मांगों का मुद्दा रखा उसपर शासन या तो आदेश जारी कर चुका है या फिर प्रक्रियाधीन है।

प्रमुख सचिव परिवहन एस रामास्वामी ने यूनियनों को जानकारी दी कि उनकी कोई मांग लंबित नहीं है। शासन के निर्देश पर सभी जनपदों के जिलाधिकारियों ने स्थानीय टैक्सी मैक्सी यूनियन कर्मियों से वार्ता कर मांग पत्र पर हुई कार्यवाही से अवगत करवा दिया है। उधर, सीएम हरीश रावत को भी शासन ने यूनियन की मांगों पर हुई कार्यवाही से अवगत करवाया।

नियम 71 वैधानिक होने के चलते उसपर कानूनी राय ली जा रही है। चुनाव में किराये पर ली जाने वाली गाड़ियों से संबंधित मांग पर निर्वाचन विभाग से वार्ता की जाएगी। रामास्वामी ने कहा कि ऐसे में हड़ताल का औचित्य नहीं रह जाता है।

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हड़ताल की वजह कहीं राजनीतिक तो नहीं

taxi strike may end on Saturday.

टैक्सी संचालकों की मांगों पर परिवहन विभाग हड़ताल से पहले ही कार्यवाही शुरू कर चुका था। कार्यवाही प्रक्रियाधीन होने के बावजूद यूनियनों के हड़ताल पर उतरने के पीछे राजनीतिक कारण भी संभव है। जिस तरह परिवहन मंत्री सुरेंद्र राकेश के लंबे समय से उपचाराधीन हैं।

बार-बार उनकी गैरमौजूदगी से विभाग के कामकाज के प्रभावित होने की बात सियासी गलियारों में उठती रही है। हड़ताल के समापन को लेकर परिवहन मंत्री की अनुपस्थिति में सिर्फ शासन स्तर पर वार्ताएं चली जबकि राजनीतिक स्तर इस दौरान कोई वार्ता नहीं हुई। जबकि इससे पहले हुई कई हड़तालों को समाप्त करवाने के लिए मंत्रियों की उपसमितियां बनी हैं और वार्ताओं को दौर भी चले हैं।

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