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नए साल पर पहाड़ों का सफर हो सकता है मुश्किल
अमर उजाला, देहरादून
Updated Sun, 22 Dec 2013 11:01 PM IST
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एंटी लॉक ब्रेकिंग सिस्टम (एबीएस) के बिना टैक्सी वाहनों के परमिट का नवीनीकरण ना करने के परिवहन विभाग के फरमान ने गढ़वाल मंडल के तीस हजार से अधिक मैक्सी कैब संचालकों का संकट बढ़ा दिया है।
गढ़वाल जीप, कमांडर, सूमो, टैंकर चालक-मालिक महासंघ ने परिवहन आयुक्त को पत्र भेजकर परमिट जारी करने की मांग की है। 31 दिसंबर तक समाधान न होने पर चक्का जाम की चेतावनी दी गई है। उत्तराखंड परिवहन महासंघ ने भी आंदोलन का समर्थन किया है।
जाएंगे मानवाधिकार आयोग
सोमवार को रिस्पना स्थित कार्यालय में चालक-मालिक महासंघ की बैठक में अध्यक्ष राजन ममगाईं ने कहा कि नवीनीकरण न होने से कई मैक्सी कैब मालिकों के साथ ही हजारों चालकों का रोजगार भी छिन रहा है। मांग पूरी न हुई तो मानवाधिकार आयोग में गुहार लगाई जाएगी।
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सचिव सत्यदेव उनियाल ने कहा कि जो सिस्टम लगाने की बात परिवहन विभाग कह रहा है वह यहां उपलब्ध ही नहीं है। कहा कि मांग न मानी गई तो अनिश्चितकाल के लिए वाहन संचालन बंद हो जाएगा। पूरे प्रदेश के वाहनों के मालिक और चालक-परिचालकों की यूनियनों से भी समर्थन लिया जा रहा है।
बैठक में कुंवर सिंह, भगवान सिंह, गुलाब सिंह, मदनमोहन, महेश, सोम प्रसाद, बीएस नेगी मौजूद रहे।
यह है मामला
केंद्र सरकार ने अक्तूबर 2007 में पहाड़ी क्षेत्रों में पर्यटन परमिट पर चलने वाले वाहनों में एबीएस लगाना अनिवार्य किया, लेकिन परिवहन विभाग बिना एबीएस वाहनों का पंजीकरण करता रहा। वर्ष 2011 में परिवहन मुख्यालय ने सभी आरटीओ और एआरटीओ को पत्र में रोक के बाद भी रजिस्ट्रेशन होता रहा।
अब इन वाहनों के परमिट का नवीनीकरण नहीं किया जा रहा है। वाहन संचालकों का कहना है कि विभाग को वाहन निर्माता कंपनी या डीलरों को एबीएस लगाने का निर्देश देना चाहिए।
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गढ़वाल जीप, कमांडर, सूमो, टैंकर चालक-मालिक महासंघ ने परिवहन आयुक्त को पत्र भेजकर परमिट जारी करने की मांग की है। 31 दिसंबर तक समाधान न होने पर चक्का जाम की चेतावनी दी गई है। उत्तराखंड परिवहन महासंघ ने भी आंदोलन का समर्थन किया है।
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जाएंगे मानवाधिकार आयोग
सोमवार को रिस्पना स्थित कार्यालय में चालक-मालिक महासंघ की बैठक में अध्यक्ष राजन ममगाईं ने कहा कि नवीनीकरण न होने से कई मैक्सी कैब मालिकों के साथ ही हजारों चालकों का रोजगार भी छिन रहा है। मांग पूरी न हुई तो मानवाधिकार आयोग में गुहार लगाई जाएगी।
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सचिव सत्यदेव उनियाल ने कहा कि जो सिस्टम लगाने की बात परिवहन विभाग कह रहा है वह यहां उपलब्ध ही नहीं है। कहा कि मांग न मानी गई तो अनिश्चितकाल के लिए वाहन संचालन बंद हो जाएगा। पूरे प्रदेश के वाहनों के मालिक और चालक-परिचालकों की यूनियनों से भी समर्थन लिया जा रहा है।
बैठक में कुंवर सिंह, भगवान सिंह, गुलाब सिंह, मदनमोहन, महेश, सोम प्रसाद, बीएस नेगी मौजूद रहे।
यह है मामला
केंद्र सरकार ने अक्तूबर 2007 में पहाड़ी क्षेत्रों में पर्यटन परमिट पर चलने वाले वाहनों में एबीएस लगाना अनिवार्य किया, लेकिन परिवहन विभाग बिना एबीएस वाहनों का पंजीकरण करता रहा। वर्ष 2011 में परिवहन मुख्यालय ने सभी आरटीओ और एआरटीओ को पत्र में रोक के बाद भी रजिस्ट्रेशन होता रहा।
अब इन वाहनों के परमिट का नवीनीकरण नहीं किया जा रहा है। वाहन संचालकों का कहना है कि विभाग को वाहन निर्माता कंपनी या डीलरों को एबीएस लगाने का निर्देश देना चाहिए।