नॉर्थ पोल छूकर उत्तराखंड की जुड़वां बहनों ने रचा इतिहास
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सात ऊंची चोटियों को फतह करने बाद दुनिया के दोनों किनारों (दक्षिणी और उत्तरी ध्रुव) को छूकर उत्तराखंड की जुड़वां बहनों ताशी-नुंग्शी ने इतिहास रच दिया है। इसके साथ ही एक्सप्लोरर्स ग्रैंड स्लैम की उपलब्धि हासिल करने वाली पहली दक्षिण एशियाई पर्वतारोही का खिताब भी ताशी-नुंग्शी के नाम दर्ज हो गया है।
दिसंबर 2014 में दोनों बहनों ने दक्षिणी ध्रुव पर तिरंगा फहराया था। अब दक्षिणी ध्रुव के बाद उत्तरी ध्रुव भी फतह करने वाली वे पहली जुड़वां बहनें बन गई हैं।
देहरादून के जोहड़ी गांव निवासी 23 वर्षीय ताशी-नुंग्शी के कदमों ने उत्तरी ध्रुव को भी नाप लिया है। दुनिया के दोनों कोने छूने के साथ ही सात सबसे ऊंची चोटियों पर चढ़कर ताशी-नुंग्शी ने अपना ‘ऊंचाइयों से आगे, दुनिया की हदों तक’ अभियान पूरा कर दुनिया को सशक्त बालिका का संदेश दिया है।
दुनिया का सबसे ठंडे क्षेत्र में 115 किमी स्कीइंग
माइनस 30 डिग्री से कम तापमान और 40 से 60 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से चलती बर्फीली हवा के बीच 30-50 किलो का वजन खींचकर दुनिया के सबसे ठंडे क्षेत्र उत्तरी ध्रुव को पार करने के लिए करीब 115 किलोमीटर का सफर दोनों बहनों ने स्कीइंग कर पूरा किया है।
ताशी-नुंग्शी के पिता वीएस मलिक ने बताया कि न्यूजीलैंड में स्पोर्ट्स एंड एक्सरसाइज डिप्लोमा की पढ़ाई कर रहीं ताशी-नुंग्शी 10 अप्रैल को नार्वे के शहर लार्यबयेन पहुंची थीं।
15 अप्रैल से नॉर्थ पोल के अभियान की शुरुआत की थी। इस बीच दोनों ने आर्कटिक महासागर के ऊपर भी करीब चार किलोमीटर स्कीइंग की। इस तरह के कठिन सफर को पूरा कर दोनों बहनों ने रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज करा दिया है।
इन पर्वतों पर फहराया है तिरंगा
मिशन 2 फॉर 7
मिशन 2 फॉर 7 में दोनों बहनों ने दुनिया की सात सबसे ऊंची चोटियों पर तिरंगा फहराया है। जो निम्न हैं...
माउंट एवरेस्ट (नेपाल), किलिमंजारो (दक्षिण अफ्रीका), एल्ब्रुस (यूरोप), अकांकागुआ (दक्षिण अमेरिका), कास्ट्रेंज पिरामिड (ऑस्ट्रियन एशिया), माउंट मेकिनली (उत्तरी अमेरिका), विंसन मेसेस (अंटार्कटिका)
यह है एक्सप्लोरर्स ग्रैंड स्लैम
विश्व की सबसे ऊंची सात चोटियों पर फतह पाने के बाद दक्षिणी और उत्तरी ध्रुव तक स्कीइंग कर पहुंचकर कीर्तिमान रचने को एक्सप्लोरर्स ग्रैंड स्लैम कहा जाता है। इसे एडवेंचरर्स ग्रैंड स्लैम भी कहा जाता है।
दुनियाभर में अब तक सिर्फ 41 लोगों ने यह उपलब्धि हासिल की है, जिनमें आठ महिलाएं हैं।