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हरिद्वारः तमिल कवि की प्रतिमा पर घमासान के बीच हुआ प्रतिमा का अनावरण

Wed, 29 Jun 2016 12:52 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, देहरादून
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, देहरादून Updated Wed, 29 Jun 2016 12:52 PM IST
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tamil poet Thiruvalluvar Statue dispute in haridwar.
तमिल कवि की मूर्ति के विरोध में उतरे संत - फोटो : अमरउजाला

तमिल कवि थिरुवल्लुवर की प्रतिमा हरकी पैड़ी क्षेत्र में लगाने के विवाद के बाद आज बुधवार को हरिद्वार में प्रतिमा स्थापना समारोह आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम में कवि की प्रतिमा का अनावरण कर दिया गया।

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प्रतिमा का अनावरण मेघायल के राज्यपाल वी. षणमुखनाथन, यूपी के राज्यपाल राम नायक और राज्यसभा सांसद तरुण विजय ने किया।यह कार्यक्रम डाम कोठी के सभागार में आयोजित किया जा रहा है। कवि थिरुवल्लुवर की प्रतिमा भी यहीं रखी गई है। 
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कार्यक्रम में उत्तराखंड सीएम हरीश रावत और राज्यपाल केके पॉल को भी आना था, लेकिन वह कार्यक्रम में नहीं पहुंचे। आयोजकों की ओर से बताया गया कि अभी कवि थिरुवल्लुवर की प्रतिमा कहा स्‍थापित होगी इसका निर्णय नहीं लिया गया है। कार्यक्रम में मेघालय के राज्यपाल और यूपी के राज्यपाल पहुंचे हैं।
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उधर, मंगलवार देर रात जब प्रशासन ने प्रतिमा को हरकी पैड़ी की बजाय शंकराचार्य चौक के पास गंगनहर किनारे लगाने की तैयारी की तो हंगामा मच गया। इसकी जानकारी होते ही बड़ी संख्या में संत चौक पर पहुंचे और विरोध प्रदर्शन करने लगे।

इसी बीच कार्यक्रम में आयोजक पूर्व राज्यसभा सांसद तरुण विजय मौके पर पहुंचे और संतों को समझाने की कोशिश की, पर संत किसी भी कीमत पर मानने को तैयार नहीं हुए।

मंगलवार रात करीब साढ़े दस बजे बड़ी संख्या संत शंकराचार्य चौक पहुंचे और यहां तमिल कवि थिरुवल्लुवर की प्रतिमा लगाने का विरोध किया।

'भावनाओं को ठेस पहुंचाने का इरादा नहीं'

tamil poet Thiruvalluvar Statue dispute in haridwar.
वार्ता करने पहुंचे थे पूर्व राज्यसभा सांसद तरुण विजय - फोटो : अमरउजाला

संतों का कहना था कि जहां मूर्ति लगाई जा रही है, वह भूमि शंकराचार्य स्मारक समिति के नाम आवंटित है। यहां पहले से आदि शंकराचार्य की प्रतिमा लगी है। इसलिए दूसरी प्रतिमा यहां नहीं लगने नहीं दी जाएगी।

विरोध की सूचना पर प्रतिमा लगवाने में अहम भूमिका निभा रहे पूर्व राज्यसभा सांसद तरुण विजय और डीएम हरबंस सिंह चुघ मौके पर पहुंचे। दोनों ने संतों को मनाने का प्रयास किया। लेकिन संतों ने उनकी एक न सुनी। 

उन्होंने एकसुर में चेतावनी दी कि अगर कवि की प्रतिमा लगाई गई तो उसे उखाड़ फेंकेंगे। देर रात एक बजे तक विवाद जारी था। इस संबंध में आला अधिकारी कार्यक्रम आयोजक तरुण विजय के साथ डाम कोठी में काफी देर तक मंथन करते रहे।

उधर, शंकराचार्य चौक पर आचार्य विशोखानंद सरस्वती, महामंडलेश्वर गिरधर गिरी महाराज, स्वामी आनंद चैतन्य महाराज, महंत रविंद्र पुरी, महंत जमनादास, स्वामी विवेकानंद, स्वामी देवानंद समेत बड़ी संख्या में संत मौजूद थे।

संत हमारे सम्मानित हैं। उनकी भावनाओं को ठेस पहुंचाने का हमारा इरादा नहीं है। उन्हें नाराज करके कोई भी निर्णय नहीं लिया जाएगा। जहां तक बुधवार को होने वाले कार्यक्रम की बात है, कोई न कोई बीच का रास्ता निकाल लिया जाएगा। 
- तरुण विजय, पूर्व राज्यसभा सांसद

Published By : Nirmala Suyal

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