फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   Swing bridge ready to link Indo-Nepal

25 साल बाद भारत-नेपाल को मिली ये सौगात, व्यापार में होगी खासी सुविधा

Sat, 10 Jun 2017 12:49 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़ 
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़  Updated Sat, 10 Jun 2017 12:49 AM IST
विज्ञापन
Swing bridge ready to link Indo-Nepal

25 साल बाद भारत और नेपाल को एक खास सौगात म‌िली है। इससे दोनों देशों को व्यापार करने में आसानी हो सकेगी।

विज्ञापन


दरअसल, भारत-नेपाल को जोड़ने के लिए एक और झूलापुल बनकर तैयार हो गया है। धारचूला और तवाघाट के बीच रौंगती नाले के पास तिकड़म नामक स्थान पर महाकाली नदी पर बनाए गए इस पुल की लंबाई 195 मीटर है।

नेपाल सरकार ने इस पुल का निर्माण 60 दिन में कर दिया। 28 लाख रुपये की लागत के इस पुल के बनने से नेपाल के हूती, तिकड़म, बाटामूनी, फारा आदि गांव के लोगों को भारतीय क्षेत्र में आने में आसानी होगी। भारतीय क्षेत्र के खेला, ऐलागाड़, स्यांकुरी, सेरी, जुम्मा, लाली, रोड़ा, तवाघाट के लोग भी अब आसानी से नेपाल जा सकेंगे।
विज्ञापन


धारचूला से कालापानी तक भारत-नेपाल सीमा पर 80 किमी लंबी सीमा पर अब तक एक भी पुल नहीं था। इस कारण नदी के दोनों ओर बसे लोग जान जोखिम में डालकर तार के सहारे अवैध तरीके से आवाजाही करने को मजबूर थे। हर साल कई लोगों को महाकाली में गिर कर अपनी जान गंवानी पड़ती थी।
विज्ञापन
विज्ञापन


विगत 25 वर्षों से भारत एवं नेपाल के लोग लाली, तिकड़म और दुमंलिंग में पुल निर्माण की मांग करते आ रहे थे, ताकि लोग वैध रास्तों से आवाजाही करें और तस्करी पर भी अंकुश लगाया जा सके। पिछले दिनों भारत सरकार ने तिकड़म और लाली में झूलापुल के स्वीकृति दे दी थी। तिकड़म पुल बनकर तैयार हो गया है।

इस पुल का निर्माण नेपाल सरकार ने किया है। नेपाल के पत्रकार राजेंद्र कुंवर ने बताया कि 195 मीटर लंबे और तीन मीटर चौड़े इस पुल को बनने में 28 लाख रुपये (नेपाली) की लागत आई और यह 60 दिन में बनकर तैयार हो गया। शुक्रवार से इस पुल से आवाजाही होने लगी है। पुल के पास भारतीय क्षेत्र में एसएसबी और नेपाल की तरफ नेपाल प्रहरी के जवान तैनात कर दिए हैं।

पहले से बने हैं कई झूलापुल

Swing bridge ready to link Indo-Nepal
demo pic - फोटो : demo

पहले से बने हैं कई झूलापुल
भारत और नेपाल को जोड़ने के लिए महाकाली नदी पर झूलाघाट, जौलजीबी, बगड़ीहाट में झूलापुल पहले से बने हैं। इन पुलों की सुरक्षा के लिए एसएसबी और नेपाल प्रहरी के जवान तैनात रहते हैं। उम्मीद है कि जल्द ही लाली के पास भी नए झूलापुल का निर्माण हो जाएगा। इससे दोनों देशों के बीच आवागमन में और आसानी हो जाएगी।

एक पुल भारत, एक नेपाल सरकार बनाती है
भारत और नेपाल के बीच 1950 में हुई आवागमन संधि के मुताबिक दोनों देशों को जोड़ने वाले पुलों के निर्माण का खर्च दोनों देश वहन करेंगे। एक पुल भारत बनाएगा तो दूसरा पुल नेपाल सरकार को बनाना होता है। वर्ष 1830 में झूलाघाट में अंग्रेजों द्वारा बनाए गए झूलापुल की देखरेख अब भारत सरकार करती है, जबकि 2013 की आपदा के समय बहे जौलजीबी के झूलापुल का पुनर्निर्माण नेपाल सरकार ने किया था। इसी तरह धारचूला के झूलापुल के देखरेख की जिम्मेदारी भारत सरकार के पास है और तिकड़म में बनाए गए नए पुल का निर्माण नेपाल सरकार ने किया है। जिलाधिकारी सी रविशंकर ने बताया कि अब यदि लाली में पुल का निर्माण होगा तो उसका खर्च भारत सरकार वहन करेगी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed