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उत्तराखंड में 15 दिन के अंदर स्वाइन फ्लू से सातवीं मौत, अब डेथ ऑडिट कराने की तैयारी

Wed, 16 Jan 2019 08:44 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Wed, 16 Jan 2019 08:44 AM IST
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Swine flu killed seven people in uttarakhand 
dead body

स्वाइन फ्लू से राजधानी में सातवें मरीज की मौत हो गई है। मंगलवार को पटेलनगर स्थित श्रीमहंत इंदिरेश अस्पताल में मोहकमपुर निवासी महिला मरीज ने उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। अस्पताल में पिछले तीन दिनों में स्वाइन फ्लू से यह चौथी मौत है। वहीं, तीन मरीजों का अस्पताल में उपचार चल रहा है।

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मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. एसके गुप्ता ने बताया कि श्री महंत इंदिरेश अस्पताल में मंगलवार को मोहकमपुर निवासी 52 वर्षीय महिला मरीज की मौत हुई। उनका पिछले कुछ दिनों से अस्पताल में उपचार चल रहा था। उन्होंने बताया कि इससे पहले रविवार को दो और सोमवार को एक मरीज की मौत हुई थी।
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इसके अलावा श्रीमहंत इंदिरेश अस्पताल, मैक्स अस्पताल और सिनर्जी अस्पताल में भी एक-एक मरीज का स्वाइन फ्लू का उपचार चल रहा है। उन्होंने बताया कि सभी निजी चिकित्सालयों को मरीजों की सूचना तुरंत उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।

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स्वाइन फ्लू से हुई मौतों का होगा डेथ ऑडिट

राजधानी में स्वाइन फ्लू से हुई मौतों का अब डेथ ऑडिट होगा। पिछले एक पखवाडे़ के दौरान स्वाइन फ्लू से सात मरीजों की मौत हुई है, जिनमें से छह अकेले श्री महंत इंदिरेश अस्पताल में हुई। स्वास्थ्य महानिदेशालय ने इस पर संदेह व्यक्त करते हुए ऑडिट कराने के निर्देश दिए हैं। 

दरअसल पिछले कुछ दिनों में पटेलनगर स्थित श्री महंत इंदिरेश अस्पताल में स्वाइन फ्लू से छह मरीजों की मौत हो चुकी है। इस पर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने सभी मरीजों की मौत के वास्तविक कारणों की समीक्षा करने का निर्णय लिया है।

स्वास्थ्य महानिदेशालय ने सभी जिलों को संदिग्ध मरीजों की मौत के मामले में डेथ ऑडिट अनिवार्य रूप से करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि ऑडिट के बाद ही मृत्यु के वास्तविक कारणों की जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए। 
 

क्या है डेथ ऑडिट 

स्वास्थ्य महानिदेशक डा. तारा चंद पंत के अनुसार कोई भी मरीज कई बीमारियों से पीड़ित हो सकता है। लेकिन उसकी मौत उनमें से किसी एक बीमारी से होती है। ऐसे में उसकी मौत के वास्तविक कारणों को जानने के लिए डेथ ऑडिट किया जाता है। इसमें विशेषज्ञ उसकी रिपोर्ट का अध्ययन कर मृत्यु के वास्तविक कारणों की पड़ताल करते हैं। उदाहरण के लिए किसी व्यक्ति को हार्ट अटैक पड़ा। उपचार के दौरान उसे स्वाइन फ्लू भी हो गया। व्यक्ति की मौत हार्ट अटैक से हुई। ऐसे में यह नहीं कहा जा सकता कि उसकी मौत स्वाइन फ्लू से हुई है। जबकि वह स्वाइन फ्लू से भी पीड़ित था।

स्वाइन फ्लू के संदिग्ध मरीजों का हम सैंपल लेते हैं। एक सैंपल की हम खुद जांच करते हैं। दूसरा सैंपल सीएमओ कार्यालय को भेजा जाता है। हमने सभी भर्ती मरीजों और मृतकों की पूरी रिपोर्ट सीएमओ कार्यालय को भेजी थी। गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों के स्वाइन फ्लू पॉजिटिव मिलने पर उनकी जान पर खतरा बढ़ जाता है। ज्यादातर बुजुर्ग, गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों को स्वाइन फ्लू से मृत्यु का खतरा भी बढ़ जाता है। 
-भूपेंद्र रतूड़ी, वरिष्ठ जनसंपर्क अधिकारी, श्री महंत इंदिरेश अस्पताल। 

स्वाइन फ्लू के मामलों में हम केवल राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीडीसी) की रिपोर्ट मानते हैं। अस्पताल ने अपनी लैब में जांच के बाद स्वाइन फ्लू की पुष्टि की है। हम डेथ ऑडिट कराने के बाद ही मृत्यु के वास्तविक कारणों को लेकर कुछ कहेंगे।
-डा. ताराचंद पंत, स्वास्थ्य महानिदेशक

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