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अस्त हो गया योग का परचम लहराने वाला 'सूरज'
ब्यूरो / अमर उजाला, ऋषिकेश
Updated Wed, 15 Jul 2015 11:29 AM IST
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प्रख्यात संत स्वामी राम के शिष्य और स्वामी राम साधक ग्राम के अध्यक्ष स्वामी वेद भारती ऋषिकेश में ब्रह्मलीन हो गए।
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वह 83 वर्ष के थे और कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे। उनके निधन से तीर्थनगरी, संत समाज, उनके अनुयायियों और एचआईएचटी संस्थान में शोक की लहर दौड़ गई। ब्रह्मलीन वेद भारती का अंतिम संस्कार शुक्रवार को किया जाएगा।
स्वामी वेद भारती ने मंगलवार तड़के करीब तीन बजे वीरभद्र बैराज स्थित स्वामी राम साधक ग्राम में अंतिम सांस ली। ध्यान मंदिर ट्रस्ट के सचिव भोला शंकर डबराल ने बताया कि तबियत बिगड़ने पर हिमालयन अस्पताल जौलीग्रांट की टीम तड़के साधक ग्राम पहुंची और स्वास्थ्य परीक्षण और उपचार के लिए उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
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उनके निधन का समाचार पाकर एचआईएचटी के कुलपति डॉ. विजय धस्माना, महामंडलेश्वर अभिषेक चैतन्य गिरि, डॉ. वीरेंद्र चौहान, डॉ. प्रकाश केशवय्या, डॉ. प्रतिमा ममगाईं, डॉ. रविंद्र ममगाईं, स्वामी वेद भारती के शिष्य सुरेश नकोटी आदि लोगों ने साधक ग्राम पहुंचकर ब्रह्मलीन संत को श्रद्धांजलि दी।
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गौरतलब है कि ब्रह्मलीन वेद भारती हिमालयन इंस्टीट्यूट एवं हास्पिटल ट्रस्ट के कुलाधिपति और निरंजनी अखाड़े के महामंडलेश्वर थे।
हिमालयी योगी स्वामी राम के शिष्य रहे स्वामी वेद भारती ब्रह्मलीन हो गए। वेद भारती के सानिध्य में वर्तमान में भारत समेत दुनिया के 56 देशों में ध्यान केंद्र संचालित हो रहे हैं। 17 भाषाओं के ज्ञाता रहे वेद भारती ने गृहस्थ के बाद सन्यास दीक्षा ली और दुनिया में धर्म और योग के क्षेत्र में परचम लहराया।
आश्रम सूत्रों के मुताबिक 1933 में देहरादून में जन्मे स्वामी वेद भारती ने स्कूल की बजाए घर पर ही वैदिक शिक्षा ग्रहण की। वह नौ वर्ष की अवस्था से ही वेद-उपनिषदों पर प्रवचन करने लगे थे। इसके बाद किशोरावस्था में ही वह साउथ अमेरिका चले गए थे।
हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत समेत दुनिया की 17 भाषाओं के ज्ञाता वेद भारती पहले गृहस्थ रहे हैं। वह 1969 में हिमालयी योगी स्वामी राम के संपर्क में आए और उनके कार्यों को आगे बढ़ाया। उन्होंने अपने जीवनकाल में धर्म और योग पर 35 पुस्तकों की रचना की। उनके द्वारा रचित योग सूत्र 800 पृष्ठ की टीका पुस्तक को विश्वभर में खासी पहचान मिली।
उन्होंने चार दिसंबर-1992 को विश्वविख्यात योग के विद्वान स्वामी राम से सन्यास दीक्षा ली। इस साधक को आध्यात्म और योग दर्शन में अनुसंधान के लिए हॉलैंड विवि द्वारा डीलिट की उपाधि से नवाजा गया। उन्होंने 1962 से 68 तक मिनेसोटा विवि अमेरिका में बतौर संस्कृत और भारतीय संस्कृति विषय के प्रोफेसर के तौर पर सेवाएं भी दी।
ध्यान योग में सिद्धि प्राप्त वेद भारती अपने गुरु स्वामी राम के नाम से स्थापित साधक ग्राम और स्वामी राम आश्रम साधना ग्राम संस्थाओं के अध्यक्ष रहे। उन्होंने 2001 में तीर्थनगरी में स्वामी राम साधक ग्राम की स्थापना की। इसके अलावा उनका समाज में भी अहम योगदान रहा। उन्होंने भारत में ध्यान मंदिर ट्रस्ट हिमालयन योग मेडीटेशन संस्थान की स्थापना भी की।
अंतिम दर्शन को जुटने लगे अनुयायी
धर्म और आध्यात्म के विश्वविख्यात विद्वान वेद भारती के ब्रह्मलीन होने की जानकारी मिलने पर तीर्थनगरी स्थित स्वामी राम साधक ग्राम में उनके अंतिम दर्शन के लिए देश विदेश से उनके अनुयायियों, शिष्यों के जुटने का सिलसिला शुरू हो गया है। आश्रम सूत्रों के अनुसार ब्रह्मलीन वेद भारती की अंत्येष्टि शुक्रवार को की जाएगी और उनकी षोड़सी 29 जुलाई को होगी।
ध्यान मंदिर ट्रस्ट के सचिव भोला शंकर डबराल ने बताया कि स्वामी वेद भारती का उनके ब्रह्मलीन होने के बाद सभी अनुयायियों, शिष्यों की मौजूदगी में अंत्येष्टि करने को मत था, लिहाजा उनकी इच्छानुसार पार्थिव शरीर को स्वामी के शिष्य स्वामी ऋतुवान भारती मुखाग्रि देंगे।
ब्रह्मलीन वेद भारती के पार्थिव शरीर को शिष्यों, अनुयायियों के दर्शनार्थ स्वामी राम साधक ग्राम के सत्संग हॉल में रखा गया है। मंगलवार सुबह से ही आश्रम में अखंड गीता पाठ का आयोजन किया जा रहा है।