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Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   swami sanand wrote Letters to central Government during death strike but all missing 

...तो अनशन के दौरान दिल्ली जाते ही कैसे गुम हो जाते थे स्वामी सानंद के लिखे पत्र

Fri, 12 Oct 2018 09:11 AM IST
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, हरिद्वार
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, हरिद्वार Updated Fri, 12 Oct 2018 09:11 AM IST
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swami sanand wrote Letters to central Government during death strike but all missing 
swami sanand

स्वामी सानंद ने आमरण अनशन पर रहते हुए सरकार को कई पत्र भेजे, लेकिन उनका हर पत्र दिल्ली की गूंज में गुम होता चला गया। उनकी किसी भी चिट्ठी-पत्री का दिल्ली से कोई जवाब नहीं आया।

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स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद ने पहला पत्र फरवरी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय मंत्री नितिन गड़करी को लिखा था। इसमें उन्होंने गंगा को अविरल बनाने के लिए गंगा पर निर्माणाधीन विद्युत परियाजनाओं के साथ ही प्रस्वावित परियोजनाओं को बंद करने और गंगा के लिए विशेष कानून बनाने की मांग की थी।
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जवाब नहीं आने पर उन्होंने 22 जून से आमरण अनशन शुरू कर दिया था। 3 अगस्त को केंद्रीय मंत्री उमा भारती उनसे मिलने के लिए आई। उमा भारती ने यह वादा भी किया था कि जल्दी ही सरकार गंगा को लेकर एक ड्राफ्ट लाने वाली है।
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मगर स्वामी सानंद जिस तरह के कानून की मांग कर रहे थे, वह संभवत: केंद्र सरकार के ड्राफ्ट में शामिल नहीं था। इसलिए उन्होंने उमा भारती का आग्रह ठुकरा दिया था।

अमित शाह ने भी नहीं ली सुध

इसके बाद 11 सितंबर को नमामि गंगे के डायरेक्टर जनरल और नीतिन गड़करी की निजी सचिव भी स्वामी सानंद से मिलने आए थे। उन्होंने एक ड्राफ्ट भी स्वामी सानंद को सौंपा था।

रातभर सानंद उस ड्राफ्ट को पढ़कर उसका जवाब देने की तैयारी करते रहे, लेकिन दोनों अधिकारी वापस लौटकर नहीं आए। इसके अलावा भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह, आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत सहित कईं नेता भी हरिद्वार आए, लेकिन स्वामी सानंद की किसी ने सुध नहीं ली।

सत्ता पक्ष की तरफ से दो दिन पहले स्थानीय सांसद रमेश पोखरियाल निशंक ने जरूर दो दिन पहले हरिद्वार से लेकर देहरादून और दिल्ली तक बड़ी गंभीर पैरवी की। उमा भारती और निशंक के प्रयासों को छोड़ दें तो सरकार की ओर से एक बार भी 112 दिनों में कोई भी गंभीर प्रयास नहीं किया गया। 

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