स्वामी दयानंद ने केंद्रीय मंत्री गड़करी समेत डीएम व एम्स निदेशक के खिलाफ दी तहरीर, हत्या का आरोप
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स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद की मौत मामले में मातृ सदन पीछे हटने को तैयार नहीं है। इसी क्रम में स्वामी दयानंद अपने वकील के साथ ऋषिकेश कोतवाली पहुंचे और एक केंद्रीय मंत्री नितिन गड़करी समेत डीएम हरिद्वार और एम्स डायरेक्टर के खिलाफ स्वामी सानंद की मौत की साजिश रचने की तहरीर दी है।
उन्होंने आरोप लगाया है कि गंगा की अविरलता और गंगत्व की रक्षा के लिए अनशन कर रहे स्वामी सानंद को साजिशन मौत के घाट उतार दिया गया। इस षड़यंत्र में बड़े ओहदे पर बैठे लोगों का हाथ है।
स्वामी दयानंद का आरोप है कि केंद्रीय मंत्री झूठ बोल रहे हैं कि गंगा की संरक्षा से जुड़ी 80 प्रतिशत मांगे मान ली गई हैं। उन्होंने कहा कि इसी तरह पूर्व में खनन और स्टोन क्रशर माफियाओं ने स्वामी निगमानंद की भी हत्या करवा दी थी।
स्वामी सानंद जिस गंगा की अविरलता की मांग कर रहे थे उन्हें सरकार मान लेती तो खनन माफियाओं के हित प्रभावित होते। आरोप लगाया कि सरकार ने पूंजीपतियों के चंगुल में आकर गंगा पुत्रों की हत्या करवाने का सिलसिला शुरू कर दिया है।
गोपाल दास एम्स से डिस्चार्ज
तहरीर सौंपने के दौरान स्वामी दयानंद के साथ अधिवक्ता अरुण भदौरिया, हेमंत ध्यानी, पुण्यानंद सरस्वती मौजूद रहे। वहीं मातृ सदन के संत देर रात कोतवाल के साथ एम्स डॉयरेक्टर से मिलने से पहुंचे, जहां बातचीत चल रही है।
अविरल गंगा के लिए अनशन कर रहे संत गोपालदास सोमवार को चिकित्सकों ने एम्स से डिस्चार्ज कर दिया है। सांय करीब 6 बजे डिस्चार्ज का निर्णय होने के बाद संत के सहयोगी संस्थान प्रशासन से डिस्चार्ज लेटर की मांग करने लगे। गोपाल दास के सहयोगी विकास ने बताया कि एम्स प्रशासन डिस्चार्ज लेटर देने में आनाकानी कर रहा है। प्रशासन पूर्व में भी आरोप लगा चुका है कि गोपालदास अचानक भाग जाते हैं। ऐसे में वह लेटर लेने के बाद ही जाएंगे।
इस दौरान एम्स प्रशासन ने कहा है कि डिस्चार्ज समरी मंगलवार को दी जाएगी। इस पर गोपाल दास के सहयोगियों ने निर्णय लिया है कि समरी मिलने के बाद ही वो परिसर छोड़ेंगे। उन्होंने बताया कि अस्पताल से निकलने के बाद त्रिवेणी घाट पर अनशन जारी रखा जाएगा।