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स्वजल परियोजना ग्राउंड रिपोर्ट : गोबर हो गई सरकार तेरी गैस, मेरा चूल्हा न जला...! 

Thu, 15 Oct 2020 01:11 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal विनोद मुसान, अमर उजाला, ऋषिकेश
विनोद मुसान, अमर उजाला, ऋषिकेश Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Thu, 15 Oct 2020 01:11 PM IST
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Swajal Project Ground Report : reality of gobar gas plant in rishikesh
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : pixabay

सरकारी धन का दुरुपयोग कैसे किया जाता है, यह देखना है तो रानीपोखरी न्याय पंचायत क्षेत्र की बड़कोट ग्रामसभा में चले आइए। जहां मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की विधानसभा होने के नाते योजनाओं को प्राथमिकता तो दी जा रही है, लेकिन इन योजनाओं का धरातल पर जनता को कितना लाभ मिल पा रहा है, यह देखने वाला कोई नहीं है। 

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ताजा मामला क्षेत्र में लगे गोबर गैस प्लांट का है, जो लगे तो ग्रामीणों के चूल्हे जलाने को थे, लेकिन दो साल के भीतर ये शोपीस बनकर रह गए हैं। रानीपोखरी क्षेत्र में 88 प्लांट लगाए गए थे। अब इक्का-दुक्का प्लांट ही काम कर रहे हैं। ग्रामीणों की शिकायत पर अमर उजाला की टीम ने मौके पर जाकर छानबीन की तो कई चौंकाने वाली बातें सामने आईं।
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अमर उजाला की टीम ने लाभार्थी नरेश रतूड़ी, अनिल गैरौला, विनोद कोठियाल, योगेश रतूड़ी, भगवती प्रसाद गैरोला, सुशील तिवाड़ी, संयज तिवाड़ी, सुभाष नाथ, राकेश तिवाड़ी, विरेंद्र नाथ, मायाराम कोठियाल आदि लोगों के घरों का दौरा किया तो इनमें से इक्का-दुक्का लोगों के घरों में ही गोबर गैस की लौ दिखाई दी। इसका फ्लैम दस मिनट से अधिक नहीं चल रहा था।
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गांव के अधिकतर लोगों ने प्लांट के ऊपर पराली के ढेर लगा दिए हैं। उनका कहना है, जब इनसे चूल्हे जलते ही नहीं तो ये किस काम के? वहीं, गांव के पूर्व प्रधान पुष्पराज बहुगुणा ने इस मामले में भ्रष्टाचार की आशंका जताई है। उनका कहना है कि प्लांट के निर्माण में लीपापोती की गई है। इसमें सही तकनीक का इस्तेमाल नहीं किया गया है। निर्माण का काम मनरेगा के तहत किया गया है।

स्वजल परियोजना के तहत लगाए गए थे प्लांट

बता दें कि स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण रुबन कार्यक्रम की स्वजल परियोजना के तहत 2017 -2018 में रानीपोखरी क्षेत्र में करीब 88 प्लांट लगाए गए थे। जबकि, अकेले बडकोट ग्रामसभा में करीब 23 गोबर गैस प्लांट लगाए गए थे। प्रति प्लांट की कीमत 37 हजार रुपये आई थी। लाभार्थी से इसका कोई पैसा नहीं लिया गया। गोबर गैस लगाने की शर्त यह थी कि लाभार्थी के यहां पशुधन होना अनिवार्य है।

हालांकि, प्लांट आवंटन में कुछ केस में इस शर्त का भी उल्लघंन किया गया। बहरहाल गांव में कई घरों में गोबर गैस प्लांट तो लग गए, लेकिन लाभार्थियों का कहना है कि उन्होंने इससे कभी एक कप चाय बनाकर नहीं पी। उन्होंने गोबर गैस प्लांट के बारे में सुना था, ये लगने के बाद कई-कई वर्षों तक चलते हैं, लेकिन यहां पता नहीं कौन सी तकनीक से ये प्लांट लगाए, जो लगने के बाद से ही नहीं चले। 

रानीपोखरी कलस्टर में बहुत से घरों में गोबर गैस प्लांट के ठीक से काम न करने की सूचना मिली है। हमने मौके पर टीम भेजकर इस दिखवाया भी है। कुछ घरों में कर्मचारियों को भेजकर इन्हें ठीक कराकर फिर से चालू करवाया है। कई बार जानकारी के आभाव में लाभार्थी गोबर गैस प्लांट का सही तरीके से संचालन नहीं कर पाते हैं, जिसके कारण भी समस्या आती है। अगले कुछ दिनों में सभी प्लांटों को ठीक कराया जाएगा। साथ ही लाभार्थियों को इनके संचालन की ट्रेनिंग भी दी जाएगी।
- सुशील डोभाल, जिला विकास अधिकारी और जिला परियोजना प्रबंधक, स्वजल 

इस विषय में मुझ तक अभी कोई शिकायत नहीं पहुंची है। यदि ऐसा है तो इस मामले की जांच कराई जाएगी। यदि योजना के क्रियान्वयन में कोई हीलाहवाली की गई है तो दोषी पाए जाने वाले कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
- उदय राज, अपर सचिव और परियोजना निदेशक, स्वजल

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