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विस्थापन के लिए हर जिले से चुने गए दस गांव

Sat, 23 Jan 2016 11:33 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून Updated Sat, 23 Jan 2016 11:33 AM IST
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survey of effected villages of uttarakhand disaster.

दैवी आपदा की जद में आए गांवों का एक और सर्वे होगा। इसके लिए भूतत्व और खनिकर्म विभाग को निर्देशित कर दिया गया है। यह सर्वे पिछले दिनों जिलाधिकारियों की रिपोर्ट में शामिल 60 गांवों का होगा। इस बार सर्वे में संस्कृति, कृषि, सामाजिक रीति रिवाज और आर्थिकी के साधनों को भी शामिल किया जाएगा।

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ऐसा इसलिए किया जा रहा है क्योंकि किसी भी गांव के विस्थापन के लिए केंद्र सरकार की 2008 की पुनर्वास नीति के तहत ये विषय जरूरी हैं और विस्थापन का पैसा भी केंद्र को ही देना है। पहले के सर्वे में यह शामिल नहीं था। इसलिए पिछले पांच सालों से गांवों की संख्या बढ़कर 341 हो गई और केंद्र ने कुछ नहीं दिया।
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उत्तरकाशी, चमोली, पिथौरागढ़, बागेश्वर, रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारियों ने कुल 60 गांवों को अतिसंवेदनशील की श्रेणी में शामिल करते हुए विस्थापित करने की संस्तुति की है। रिपोर्ट के अध्ययन के बाद सभी जिलाधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि अपने अपने जनपद से 10-10 गांव ऐसे चिह्नित करें, जिन्हें सबसे पहले विस्थापित करने की जरूरत है।

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टॉप खतरे की जद वाले 10 गांवों का होगा विस्थापन

survey of effected villages of uttarakhand disaster.

शासन ने दो महीने पहले अपर सचिव आपदा प्रबंधन की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन भी किया था। अब भूतत्व व खनिकर्म विभाग को जिलाधिकारियों की रिपोर्ट में शामिल गांवों के साथ ही हर जिले में ऐसे 10-10 गांवों का सर्वे करने को कहा है जो कि सर्वाधिक संवेदनशील हैं और जिन्हें सबसे पहले विस्थापित किया जाना होगा।

इस बार के सर्वे में भूतत्व व खनिकर्म विभाग के साथ कई टीमें रहेंगी। हर जिले में खतरे की जद वाले टॉप 10 गांवों का सर्वे होगा। आसपास जमीन की उपलब्धता, गांव का कितना हिस्सा खतरे में है, विस्थापन से गांव की सामाजिकता और संस्कृति का हनन तो नहीं होगा और कृषि भूमि का क्या होगा, इन सभी विषयों पर सर्वे होगा।

यह भी देखा जाएगा कि यदि समुदाय विशेष का गांव है तो उसे दूसरे समुदाय के बीच बसाने से कोई दिक्कत तो नहीं होगी। फिलहाल जो रिपोर्ट है, उसके आधार पर आगे का सर्वे शुरू होगा और फिर विस्थापन की प्रक्रिया शुरू होगी।

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