बेहद खतरनाक है चारधाम यात्रा का रूट: सर्वे
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शीतकालीन चारधाम यात्रा पर संभागीय परिवहन कार्यालय की सर्वे रिपोर्ट ने प्रश्न चिन्ह लगा दिया है। दुर्घटना के लिहाज से हर रूट पर 40 से 50 संवेदनशील प्वाइंट पाए गए हैं। कई मार्गों पर तो गदेरों का पानी बह रहा है।
मानसून में हर रूट पर 65 फीसदी सड़कें टूट चुकी हैं। इस स्थिति में भी सरकार शीतकालीन यात्रा कराती है तो यह कदम दुस्साहसिक ही होगा।
एक माह पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने शीतकालीन चारधाम यात्रा की घोषणा की थी। इसके लिए परिवहन विभाग को चारों रूटों का सर्वे करने को कहा गया था। सहायक संभागीय परिवहन अधिकारियों ने चारों रूटों का स्थलीय दौरा किया और रिपोर्ट तैयार की।
शुक्रवार को रिपोर्ट संभागीय परिवहन कार्यालय को सौंप दी गई। हालांकि, इस संबंध में कोई भी अधिकारी कुछ बताने को तैयार नहीं है। लेकिन सूत्रों के अनुसार, चारों रूट अनफिट पाए गए हैं।
मानसून में बर्बाद हुई सड़कों को तैयार करने में मार्च तक का समय लग सकता है। सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी डीएस पठोई ने बताया रिपोर्ट मिल गई है और इसकी समीक्षा की जा रही है।
जानिए, किस तरह हुआ था सर्वे
सर्वे के लिए चार रूटों को अलग-अलग भाग में बांटा गया। ऋषिकेश से चंबा होते हुए धरासू बैंड तक एआरटीओ डॉ. अनीता चमोला ने सर्वे किया। उनकी रिपोर्ट के अनुसार इस रूट पर दुर्घटना के लिहाज से 50 अति संवेदनशील प्वाइंट हैं।
एआरटीओ सुरेंद्र कुमार ने ऋषिकेश से ऊखीमठ तक सर्वे किया। इस रूट पर 52 अति संवेदनशील स्थान मिले हैं। जबकि पीटीएस पीसी पांडे ने धरासू से मुखवा और देहरादून से खर्साली तक सर्वे किया। मुखवा तक 21 और खर्साली तक में 13 प्वाइंट अति संवेदनशील हैं।
नोटः इस खबर से संबंधित किसी भी सुझाव या सवाल के लिए मेल आईडी- manmeetr@ddn.amarujala.com और इस नंबर- 8392946711 पर संपर्क कर सकते हैं।
दूर-दूर तक नहीं डॉक्टर
सर्वे रिपोर्ट के अनुसार चारधाम यात्रा मार्गों पर स्वास्थ्य सेवाएं भी बदहाल हैं। कई रूटों पर डाक्टर का दूर दूर तक पता नहीं है। जबकि अस्पतालों की भी भारी कमी है।