किराए की कोख से पैदा हुए जुड़वा तो महिला ने पार की धोखेबाजी की हद
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किराये की कोख से कथित रूप से जन्मे जुड़वा बच्चों को लेकर ऋषिकेश कोतवाली पहुंचे एक मामले को पुलिस ने सरोगेसी की पूरी प्रक्रिया और प्रावधान को जाने-समझे बगैर दोनों पक्षों में समझौता करवाकर निपटा दिया।
करीब दो साल पहले सौ रुपये के हलफनामे में हुए सरोगेसी के एग्रीमेंट को लेकर दंपति थाने आया और जुड़वा बच्चों में से एक ही बच्चा उन्हें मिलने की बात कही। उन्होंने पुलिस से अर्ज किया कि उन्हें दूसरा बच्चा भी दिलवाया जाए।
पुलिस इस मामले के बिचौलिए को ऋषिकेश लाई और केवल उसके कहे मुताबिक कि एक बच्चा मर गया, दोनों के बीच समझौता करवाकर मामला खत्म कर दिया। इस मामले से जुड़े लोगों का मानना है कि अगर पुलिस ने कायदे से तहकीकात की होती तो सरोगेसी से जुड़े अवैध कारोबार का भी खुलासा हो सकता था।
दो लाख रुपये में हुई थी बात
हरिद्वार जिले के एक दंपति ने ऋषिकेश कोतवाली में बीती छह अप्रैल को तहरीर दी। साथ ही एक नोटराइज्ड अनुबंध पत्र भी लगाया गया।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, दंपति ने बताया कि वे लंबे समय से शादीशुदा हैं, मगर किन्हीं कारणों से उन्हें औलाद नहीं हुई। किसी ने उन्हें सरोगेसी के बारे में बताया और मेरठ के एक व्यक्ति से मिलवाया। यह व्यक्ति एक बिचौलिया था, जिसने उन्हें एक सरोगेट मदर से मिलवाया। महिला दंपति के बच्चों को जन्म देने को राजी हो गई। इसके लिए दो लाख रुपये में बात भी बन गई।
22 जून 2015 को सरोगेट मां ने उन्हें एक बच्चा सौंप दिया। इसके बाद दोनों पक्ष संतुष्ट हो गए। सब कुछ ठीक चल रहा था कि दंपति को मालूम चला कि सरोगेट महिला को जुड़वा बच्चे पैदा हुए थे, जिसमें एक बच्चा उसने अपने पास रख लिया। दूसरा बच्चा भी उससे देने को कहा गया तो उसने यह कहा कि दूसरे बच्चे की जन्म के समय ही मौत हो गई थी।
गोपनिय तरीके से हासिल की दूसरे बच्चे की जानकारी
दंपति ने जब गोपनीय तरीके से जानकारी की तो मालूम चला कि दूसरा बच्चा बिल्कुल स्वस्थ है और सरोगेट मदर के ही पास है। सुबूत के तौर पर उन्होंने बच्चे की फोटो भी खींच ली। इसके बाद दंपति ने ऋषिकेश कोतवाली में तहरीर देते हुए दूसरा बच्चा दिलवाने की मांग की।
तहरीर के साथ सरोगेट मदर के साथ हुए अनुबंध पत्र और बच्चे की फोटो भी दी गई है और यह तर्क भी दिया गया है कि सरोगेट मदर मेरठ में काफी पिछड़े इलाके में रहती है। वे आर्थिक रूप से काफी कमजोर है और बच्चे की ठीक प्रकार परवरिश नहीं कर सकती। यह भी आरोप लगाया गया है कि सरोगेट मदर ने अनुबंध का भी उल्लंघन किया है।
कोतवाली का कार्यभार देख रखीं एएसपी निहारिका भट्ट ने एसआई रियाज अहमद को इस मामले की जांच सौंप दी। जांच में आए तथ्यों के आधार पर पुलिस ने दोनों पक्षों में सुलह होने का दावा किया है। हालांकि, यह साफ नहीं हो सका कि किराये पर कोख देने वाली महिला कौन है। वहीं, यह भी सवाल उठता है कि पुलिस ने सरोगेसी के लिए अपनाई गई प्रक्रिया का पालन के बाबत गहराई से पड़ताल क्यों नहीं की?
कार्रवाई से किया इनकार
डीआईजी पुष्पक ज्योति ने एएसपी निहारिका भट्ट के हवाले से दावा किया कि पुलिस महिला की तहरीर पर बिचौलिए को मेरठ से ऋषिकेश लाई थी। बिचौलिए के बयानों से पुष्टि हुई कि जुड़वा बच्चों में से दूसरे की मौत हो चुकी है। शिकायकर्ता के संतुष्ट होने के कारण किसी पक्ष पर कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की गई है।
अब आसान नहीं है सरोगेसी
1 देश में सिर्फ भारतीय ही ले सकेंगे सरोगेसी की सुविधा।
2 कानूनी तौर पर मान्य दंपति को ही मिलेगा फ ायदा।
3 अविवाहित, समलैंगिक लिव इन, सिंगल पैरेंट्स को इजाजत नहीं।
4 शादी के पांच वर्ष बाद ही दंपति ले सकेंगे सरोगेसी की मदद।
5 पहले से एक भी बच्चा है तो नहीं ले सकेंगे सरोगेसी सुविधा।
6 कानून का उल्लंघन करने वालों को दस वर्ष तक की कैद।
अधिवक्ता का बयान
2016 में पास हुए सरोगेसी बिल के तहत अब केवल नजदीक की रिश्तेदार ही सरोगेट मदर हो सकती है। यह भी अनिवार्य है की सरोगेसी मदर बनने वाली महिला विवाहित हो। जीवन काल में महिला एक बार ही सरोगेट मां बन सकती है। मेडिकल बोर्ड के सामने प्रक्रिया पूरी होने के साथ मजिस्ट्रेट से उसकी अनुमति ली जाती है। एक्ट का उल्लंघन करने की स्थिति में दस साल के कारावास के अलावा दस लाख रुपये के जुर्माने का भी प्रावधान है।
- हेमंत गुप्ता, एडवोकेट