डेथ वारंट पर कोली की मां ने किया अंगूठा लगाने से इंकार
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निठारी कांड के अभियुक्त सुरेंद्र कोली के मंगरूखाल स्थित घर डेथ वारंट की सूचना (रेडियोग्राम) पर अंगूठा लगवाने पहुंचे सल्ट के तहसीलदार को सोमवार को बैरंग लौटना पड़ा। वह उसे तामील नहीं करा सके।
कोली की मां कुंती देवी ने उस तामीली पर अंगूठा लगाने से इंकार कर दिया। इसके बाद तहसीलदार ने गांव के प्रधान को सूचना प्राप्त करवाया। हालांकि मेरठ जिला जेल के वरिष्ठ जेल अधीक्षक ने अपराधी के परिजन को ही तत्काल सूचना देने के लिए रेडियोग्राम भेजा था।
सुरेंद्र कोली का डेथ वारंट लेकर सोमवार को दिन में सल्ट तहसील के प्रभारी तहसीलदार मोहन सिंह नेगी मंगरुखाल पहुंचे। तहसीलदार के पहुंचते ही कोली के घर में ग्रामीणों की भीड़ लग गई। तहसीलदार ने डेथ वारंट की सूचना पढ़कर सुरेंद्र कोली की मां को सुनाया और कोली को सात से 12 सिंतबर के बीच फांसी दिए जाने की सूचना दी।
सुरेंद्र से मिलाने की गुहार
बेटे को फांसी की सजा दिए जाने की खबर सुनते ही मां कुंती की आंखें छलक उठीं। वह फफक-फफक कर एक बार सुरेंद्र से मिलाने की गुहार लगा रही थी। बेटे से मुलाकात के बगैर उनसे वारंट पर अंगूठा लगाने से इंकार कर दिया। कई बार समझाने के बाद भी वह नहीं मानी।
इसके बाद तहसीलदार ने गांव के प्रधान आनंद राम को सुरेंद्र का डेथ वारंट की सूचना संबंधी पावती को तामील करवाया। मंगरुखाल के ग्रामीण भी कोली की फांसी की सजा मुकर्रर होने से दु:खी हैं। उन्होंने कहा कि निठारी कांड का साजिशकर्ता मनिंदर पंधेर है। ग्रामीणों ने सुरेंद्र के मालिक पंधेर को भी कड़ी सजा देने की मांग की है।
आखिर किसी को तो हुआ मां की ममता का अहसास
निठारी कांड में फांसी की सजा का इंतजार कर रहे सुरेंद्र कोली की मां कुंती देवी को फांसी से पहले बेटे से मिलने की इच्छा उसके अन्य बेटों ने पूरी नहीं की, लेकिन अमर उजाला में खबर पढ़ने के बाद मुजफ्फरनगर के समाजसेवी संजय कश्यप को एक बेटे के लिए मां की ममता का अहसास हुआ।
वह सोमवार को सैकड़ों किमी दूर कोली के गांव मुंगरूखाल पहुंच गए। संजय का कहना है कि वह मंगलवार को कुंती देवी को अपने साथ मेरठ ले जाकर सुरेंद्र कोली से मिलाएंगे।
सुरेंद्र कोली की मां कुंती देवी चाहती है कि फांसी से पहले कोई उसे मेरठ ले जाकर उसके बेटे से मिला दे। कुंती देवी के तीन अन्य बेटे भी दिल्ली में प्राइवेट नौकरी करते हैं लेकिन वह भी मां कुंती को सुरेंद्र कोली से मिलाने नहीं ले गए।
कुंती देवी के बारे में अमर उजाला में खबर पढ़ने के बाद मुजफ्फरनगर निवासी समाजसेवी और राष्ट्रीय लोकदल के प्रदेश महासचिव संजय कश्यप सोमवार को सैकड़ों किमी यात्रा करने के बाद सुरेंद्र कोली के गांव मुंगरूखाल पहुंच गए।
मेरठ रवाना होने की उम्मीद
वह अपनी कार लेकर किसी तरह रामनगर तक पहुंचे, लेकिन इस दूरस्थ गांव के लिए बार-बार मार्ग भटक जाने के कारण आखिरकार उन्होंने कार रामनगर में छोड़ दी और टैक्सी जीप में सवार होकर मुंगरूखाल पहुंच गए।
उन्होंने मुंगरूखाल में सुरेंद्र कोली की मां कुंती देवी को बताया कि वह उसके बेटे से मिलाने के लिए उसे मंगलवार को मेरठ जेल ले जाना चाहते हैं। जहां सुरेंद्र कोली बंद है। कुंती देवी वहां जाने को राजी हो चुकी है। संजय कश्यप और उनका एक अन्य साथी सोमवार को गांव में ही ठहरे हैं।
संजय कश्यप ने ग्राम प्रधान आनंद राम से भी बात की है ताकि वह किसी व्यक्ति को कुंती देवी के साथ के लिए भेज दें। इन लोगों के कल मंगलवार की सुबह मेरठ रवाना होने की उम्मीद है। मालूम हो कि कुंती देवी गांव में अकेली रहती है। सुरेंद्र कोली की पत्नी तीन माह पहले अपने दोनों बच्चों को लेकर अपने भाई के पास दिल्ली चली गई थी।