बच्चों के गले लगते ही जेल में फफक पड़ा कोली
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
निठारी कांड में डासना जेल में बंद फांसी की सजा पाए सुरेंद्र कोली से रविवार को उसकी पत्नी और बेटी-बेटे ने मुलाकात की। जेल में सुरेंद्र दोनों बच्चों शुभम (8) और सिमरन (10) को गले लगाकर रोने लगा।
क्षेत्र के जिला पंचायत सदस्य नारायण सिंह की पहल पर सुरेंद्र से मिलने उसकी पत्नी शांति कोहली, बेटा शुभम, बेटी सिमरन करीब 11 बजे डासना जेल पहुंचे। पैदा होने के बाद आठ वर्षीय पुत्र शुभम को सुरेंद्र ने रविवार को पहली बार देखा।
दोनों बच्चों को देखते ही सुरेंद्र की आंखें छलक आईं और उसने दस मिनट तक दोनों बच्चों को गले लगाकर रखा। जब तक सुरेंद्र बच्चों को गले लगाए रहा उसकी आंखों से आंसू बहते रहे।
पत्नी से कहा, मुझे बात रखने का मौका नहीं मिला
सुरेंद्र की पत्नी शांति आठ साल बाद पति सुरेंद्र से जेल में बच्चों के साथ मिली। सुरेंद्र से मिलने पर शांति ने उससे पहला सवाल यही पूछा कि क्या उसने इस घटना को अंजाम दिया है।
इस पर सुरेंद्र ने कहा कि वह निर्दोष है और उसे फंसाया गया है। मुझे अपनी बात रखने का मौका नहीं मिला। बताया कि पक्ष रखने के लिए कई चिट्ठियां उत्तराखंड सरकार, राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और अन्य संगठनों को भेजी, लेकिन किसी से सहयोग नहीं मिला।
सुरेंद्र ने पत्नी शांति से कहा कि यदि उसे एक बार अपनी बात रखने का एक मौका मिल जाए तो वह बेकसूर साबित होगा। जिला पंचायत सदस्य नारायण सिंह ने बताया कि सुरेंद्र से मिलने के बाद पत्नी और बच्चे दिल्ली लौट गए हैं।