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सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने तोड़ा ऊर्जा प्रदेश का सपना

Wed, 14 Aug 2013 12:00 PM IST
देहरादून/ब्यूरो
देहरादून/ब्यूरो Updated Wed, 14 Aug 2013 12:00 PM IST
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Supreme Court decision broke the dream of power state

सुप्रीम कोर्ट के फैसले से केंद्र की ओर से रोकी गई बड़ी जल विद्युत परियोजनाओं पर दुबारा काम शुरू कराने की प्रदेश सरकार की कोशिशों पर पानी फिर गया है। यही नहीं, उत्तराखंड को ऊर्जा प्रदेश बनाने का सपना भी इसी के साथ चकनाचूर हो गया।

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भौरोघाटी, पाला मनेरी जैसी बड़ी परियोजनाओं को पर्यावरण प्रेमियों के आंदोलन के चलते केंद्र ने काफी पहले रोक दिया था। इन परियोजनाओं को शुरू कराने की राज्य सरकार लगातार केंद्र में प्रयास कर रही है। साथ ही छोटी जल विद्युत परियोजनाओं के आवंटन की भी प्रक्रिया शुरू की है।
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बताया गया कि पांच से 25 मेगावाट क्षमता की 56 जल विद्युत परियोजनाओं के पर्यावरणीय प्रभावों के अध्ययन का जिम्मा आईआईटी रुड़की को सौंप गया है। उसकी रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले से सरकार के प्रयासों को झटका लगा है। बड़ी परियोजनाओं के शुरू होने की उम्मीदें लगभग क्षीण हो गई हैं। छोटी परियोजनाओं के लिए भी अब सुप्रीमकोर्ट को संतुष्ट करना पड़ेगा।

लखवाड़-बयासी पर भी अड़ंगे की संभावना
इस साल के अंत तक लखवाड़-बयासी जैसी परियोजना पर भी काम शुरू होना प्रस्तावित है। अदालत के नए फैसले के बाद इस परियोजना पर भी अड़ंगे की संभावना बनती दिख रही है। हालांकि केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय से लखवाड़-बयासी समेत तीन नई जल विद्युत परियोजनाओं को हरी झंडी मिल चुकी है।

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