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चकराता रोड रि-डेवलपमेंट पर लगा ब्रेक

अमर उजाला, देहरादून Updated Thu, 24 Oct 2013 09:08 AM IST
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supreme court ban on nainital high court order

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देहरादून के चकराता रोड रि-डेवलपमेंट मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को नैनीताल हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी।
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इस आदेश में आपात उपबंध के तहत इस भूमि को अधिग्रहीत कर विकास प्राधिकरण के हवाले करने का आदेश दिया गया था।
साथ ही शीर्षस्थ अदालत ने राज्य सरकार की ओर से हाईकोर्ट के आदेश पर अधिग्रहण के संबंध में जारी की गई अधिसूचना पर भी रोक लगा दी।
नोटिस जारी किया
चीफ जस्टिस पी. सदाशिवम् की अध्यक्षता वाली पीठ ने चकराता रोड दुकानदार व निवासी कल्याण सोसाइटी की ओर से हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर अपील पर राज्य सरकार, देहरादून विकास प्राधिकरण व अन्य प्रतिपक्षों को नोटिस जारी किया है।

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पीठ के समक्ष सोसाइटी की ओर से पेश हुए अधिवक्ता विशाल गुप्ता ने कहा कि हाईकोर्ट ने एक ऐसी जनहित याचिका पर राज्य सरकार को निजी भूमि को अधिग्रहीत करने का आदेश दिया जिसमें इस मसले के संपूर्ण तथ्यों को पेश नहीं किया गया था। और हमें पक्षकार तक नहीं बनाया गया जो नैसर्गिक न्याय का उल्लंघन है।

अधिवक्ता ने कहा कि इस क्षेत्र में पुनर्निर्माण के लिए इमारतों को तोड़ा गया था। यह कार्य नगर निगम की ओर से सोसाइटी की सहमति से दिसंबर, 2011 में सड़क चौड़ीकरण के लिए किया गया था।

प्राधिकरण की ओर से मंजूरी मिलना बाकी था
अधिवक्ता ने पीठ को बताया कि इसके बाद हाईकोर्ट में राजेंद्र सिंह की ओर से जनहित याचिका दायर कर कहा गया कि इससे अन्य भवनों को नुकसान पहुंचा है क्योंकि तोड़फोड़ अनापशनाप तरीके से की गई।

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इस पूरी भूमि पर पुनर्निर्माण इसलिए नहीं किया जा सका था। क्योंकि इसका कुछ हिस्सा नजूल का था और प्राधिकरण की ओर से मंजूरी मिलना बाकी था।

अधिवक्ता ने कहा कि राज्य सरकार ने भी हाईकोर्ट में इस मामले में सही स्थिति को स्पष्ट नहीं किया। इसके बाद हाईकोर्ट ने 8 अक्तूबर को राज्य सरकार को भूमि अधिग्रहण अधिनियम की धारा-17 आपात उपबंध के तहत जमीन अधिग्रहीत कर विकास प्राधिकरण को देने का फैसला दिया।

राज्य सरकार के विवेक पर निर्भर
साथ ही पुनर्विकास योजना का कार्य करने का आदेश दिया। अधिवक्ता ने कहा कि हाईकोर्ट प्रभावित होने वाले लोगों को पक्षकार बनाए बिना आदेश नहीं जारी कर सकता।

इसके अलावा हाईकोर्ट की ओर से जमीन अधिग्रहीत करने का आदेश दिए जाने का कोई औचित्य नहीं है। यह राज्य सरकार के विवेक पर निर्भर है।

इसके अलावा अधिग्रहण के लिए आपात उपबंध लागू किए जाने की वजह भी प्रभावित पक्ष की समझ से परे है। पीठ ने अधिवक्ता के तर्क से सहमति जताते हुए हाईकोर्ट के फैसले और राज्य सरकार की ओर से अधिग्रहण के लिए 11 अक्तूबर को जारी की गईअधिसूचना पर रोक लगा दी।

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