उत्तराखंड पॉवर प्रोजेक्ट के लिए केंद्र को SC की फटकार
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उत्तराखंड में चल रही विद्युत परियोजनाओं पर केंद्र को उसके ढुलमुल रवैये पर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को फिर फटकार लगाई और स्वीकार्य योग्य समाधान पेश करने की हिदायत दी।
कोर्ट ने कहा कि हम बिजली की समस्या से जूझ रहे हैं, लिहाजा कारगर कदम उठाने की जरूरत है। जलविद्युत परियोजनाएं बिजली उत्पादन का सबसे सस्ता माध्यम हैं, इसकी जरूरत भी है।
अगर इन परियोजनाओं से पर्यावरण को खतरा था तो इन्हें वन और पर्यावरण की मंजूरी क्यों दी गई और सरकार फिर इन्हें रद्द क्यों नहीं कर रही है। अदालत ने यह भी पूछा कि सरकार उन अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई करने के बारे सोच रही है, जिन्होंने इन परियोजनाओं को मंजूरी दी थी। क्या ये अधिकारी अब भी उसी विभाग में बने हुए हैं।
अदालत ने केंद्र को इस संबंध में और अध्ययन करने और ऐसा हल निकालने के लिए कहा है, जिससे पर्यावरण पर असर न पड़े। अदालत ने इन परियोजनाओं के भविष्य के बारे में अटॉर्नी जनरल को मदद करने के लिए कहा है। न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा और न्यायमूर्ति यूयू ललित की पीठ ने कहा कि यह सब आपका (केंद्र का) ही किया धरा है।
क्यों नहीं पैसे लौटा दिए जाएं?
महीनों से पर्यावरण बोर्ड की बैठक तक नहीं हुई। इन परियोजनाओं के मद में एनटीपीसी, एनएचपीसी सहित कई कंपनियां मोटी रकम खर्च कर चुकी हैं। अगर परियोजनाएं पर्यावरण के अनुकूल नहीं हैं तो क्यों नहीं उनके पैसे लौटा दिए जाएं।
हालांकि, अदालत ने कहा कि इन सभी कवायदों में पर्यावरण से किसी प्रकार का समझौता नहीं होना चाहिए। सभी पहलुओं पर स्पष्टीकरण के लिए अदालत ने सुनवाई की अगली तारीख पर अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी को पेश होने के लिए कहा।
मालूम हो कि केंद्र सरकार ने स्वीकार किया है कि गत वर्ष उत्तराखंड में आई तबाही की वजह कहीं न कहीं जल विद्युत परियोजनाएं रहीं। गौरतलब है कि उत्तराखंड की अलकनंदा और भगीरथी नदी के आसपास पर्यावरण के खतरे को देखते हुए अदालत ने प्रस्तावित 39 परियोजनाओं में से 24 पर रोक लगा दी है।