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गन्ने की पेराई डकार जाएगी मेहनत की कमाई
अनूप वाजपेयी / अमर उजाला, देहरादून
Updated Wed, 12 Nov 2014 04:25 PM IST
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छोटे बैंक बचत खातेदारों की मेहनत की कमाई एक बार फिर गन्ना किसानों के नाम पर निजी चीनी मिलों को सौंपने की तैयारी है।
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किसानों का बकाया चुकाने के लिए लेंगे बैंक से ऋण
सोमवार को हुई उत्तराखंड कैबिनेट की बैठक में किसानों का बकाया चुकाने के लिए कोऑपरेटिव बैंक से सवा सौ करोड़ रुपए ऋण के रूप में दिलाने पर चर्चा हुई। जिस पर कुछ मंत्रियों ने सीधे तौर पर आपत्ति जताई।
मंत्रियों को कहना था कि निजी चीनी मिल अपने संसाधन तो बढ़ा रही हैं लेकिन किसानों के भुगतान जानकर नहीं करती हैं और बाद में राज्य सरकार को हस्तक्षेप करना पड़ता है। किसानों का भुगतान जरूरी है लेकिन इसकेलिए कोऑपरेटिव बैंकों को कमजोर न बनाया जाए।
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हरिद्वार जिले की तीन निजी चीनी मिलों से गन्ना किसानों का भुगतान न होने पर सरकार एक बार फिर को-ऑपरेटिव बैंक सहारा दिख रहे हैं। जिनकी मदद से मिलों को ऋण दिलाना चाहती है। जबकि पूर्व में भी दो बार को-ऑपरेटिव से ऋण दिलाया गया है, जिसकी वापसी नहीं हुई है।
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कोऑपरेटिव बैंक और संबंधित विभाग इस बार ऋण देने से हिचकिचा रहे हैं। सचिवालय से सीएम को भेजी गई फाइल में एक अधिकारी ने स्पष्ट टिप्पणी में कोऑपरेटिव बैंक पर बोझ पड़ने की बात लिखी है।
कैबिनेट की बैठक में यह मुद्दा उठा तो कुछ मंत्री इस पक्ष में थे कि किसानों को भुगतान तत्काल हो लेकिन एक बार फिर को-ऑपरेटिव बैंकों पर बोझ डालना उचित नहीं है। दरअसल काशीपुर चीनी मिल प्रदेश के लिए सबसे बड़ा उदाहरण है। चीनी मिल मालिक ने घाटा दिखाकर खुद को उत्तर प्रदेश में शिफ्ट कर लिया है।
किसानों का बकाया चुकाने के लिए सरकार ने काफी जतन किए लेकिन बताते हैं कि मिल की बेकिमती जमीन का काफी हिस्सा पूर्व में ही दूसरे के नाम हो गया था। इतना ही नहीं सरकार के हाथ सिर्फ स्क्रैप लगा है।
सरकार के एक मंत्री का कहना है कि गन्ना किसानों का भुगतान तो कराना ही होगा। 18 नवंबर को होने वाली कैबिनेट में हो सकता है इस पर कुछ फैसला भी हो जाए।
कैबिनेट ने स्टॉक बेचने की अनुमति दी
कैबिनेट की बैठक में ऋण पर फैसला भले ही टल गया हो लेकिन चीनी मिल मालिकों को चीनी स्टॉक बेचने की अनुमति दे दी गई है।