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ऐसे तो हो चुका केदारघाटी का पुनरुद्धार
देहरादून/प्रवेश कुमारी
Updated Tue, 23 Jul 2013 10:32 PM IST
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केदारधाम के पुनरुद्धार को लेकर कितनी गंभीरता बरती जा रही है, इसका एक नमूना सामने है।
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केदारनाथ मंदिर के भीतर और इसके परिसर में जमा मलबे को हटाने के लिए तकनीकी मदद को आर्कियोलाजिकल सर्वे आफ इंडिया (एएसआई) की टीम को दिल्ली से बुलाया गया।
टीम पहुंची भी, लेकिन निरीक्षण के लिए बजाय विशेषज्ञों को ले जाने के अफसरों को तरजीह दी गई। हैरत यह कि चापर से खुद प्रदेश के मुखिया विजय बहुगुणा अफसरों के साथ मौका मुआयना को पहुंचे, लेकिन एएसआई की टीम के लिए चापर की अनुपलब्धता दर्शा दी गई।
केन्द्र से मांगे विशेषज्ञ
बता दें कि प्रदेश के मुख्य सचिव सुभाष कुमार ने केंद्रीय संस्कृति सचिव रविंद्र सिंह को पत्र लिखकर वहां से विशेषज्ञों की टीम को भेजने का अनुरोध किया था, ताकि वह कंपनी के साथ मिलकर केदारनाथ मंदिर समेत इसके परिसर से मलबा हटाने में तकनीकी मदद मुहैया करा सके।
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इसके लिए यहां शनिवार को दिल्ली से टीम पहुंच गई, जिसमें दिल्ली सर्किल के निदेशक आरके सिन्हा, निदेशक संरक्षण जाह्नवी शर्मा, संस्थान के आगरा सर्किल से आए संरक्षण अधिकारी पंकज तिवारी शामिल थे।
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टीम 48 घंटे यहां रही, लेकिन जब दौरे की बात आई तो विशेषज्ञों को साथ ले जाना जरूरी नहीं समझा गया। आखिर, जरूरी काम होने की बात दोहरा विशेषज्ञों ने वापस दिल्ली की डगर पकड़ ली।
मलबा हटाने के नाम पर हो रही हैं बातें
एएसआई के अधिकारियों ने खुद माना कि केदारनाथ मंदिर परिसर से मलबा हटाने के नाम पर केवल बातें हो रही है। उधर, विशेषज्ञों के लौटने की बात मुख्य सचिव अंजान थे। उनका कहना था कि टीम को मंगलवार को चापर से रवाना किया जाएगा।
क्या कहतें हैं अधिकारी
'हमारे पास निरीक्षण के लिए चार लोगों की लिस्ट है। इन्हें चापर मुहैया कराया जा रहा है। मंगलवार को मौसम ठीक रहा तो इस टीम को भेजा जाएगा। इसमें एएसआई के लोग भी होंगे।'
सुभाष कुमार, मुख्य सचिव, उत्तराखंड
'ईपीआईएल नाम की जिस कंपनी को मलबा हटाने का ठेका दिया गया है, वहां से फोन आया था। चापर मिलने और चलने की बात कही जा रही है। लेकिन विशेषज्ञों की टीम लौट चुकी है। मैं अकेला जाकर क्या करूंगा।'
अतुल भार्गव, अधीक्षण पुरातत्वविद्, एएसआई, दून सर्किल।
पुनरुद्धार को अगस्त माह महत्वपूर्ण
जुलाई माह का अािखरी सप्ताह चल रहा है। केदारघाटी के पुनरुद्धार को अगस्त माह बेहद महत्वपूर्ण है। इसके बाद सितंबर माह में बर्फ की वजह से कार्य आगे न चल पाने से दिक्कत खड़ी हो सकती है।