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उत्तराखंडः खंडहरों में होगी 'धनवर्षा', आप भी भर सकते हैं झोली

Sun, 17 May 2015 05:47 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून Updated Sun, 17 May 2015 05:47 PM IST
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subsidy on mushroom production in ruins.

उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों खंडहरों में अब धनवर्षा होगी। इतना ही नहीं इससे पहाड़ में हो पलायन भी रुकेगा।

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उत्तराखंड के खाली हुए गांवों और खंडहर भवनों में मशरूम उत्पादन पर भी सब्सिडी योजना का लाभ मिलेगा। वहीं मशरूम उत्पादन में कंपोस्ट एवं ढुलान पर दी जाने वाली सहायता को 50 फीसदी से बढ़ाकर 80 फीसदी किया जाएगा।

कृषि मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत ने शनिवार को देहरादून में इसकी घोषणा की। वह किसान भवन में आयोजित मशरूम उत्पादन पर आयोजित दो दिवसीय राज्य स्तरीय संगोष्ठी में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे।
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कृषि मंत्री ने कहा कि पलायन से पहाड़ में कई गांव खाली हो चुके हैं। इन गांवों में भवन खंडहर बने हैं, यदि कोई व्यक्ति खाली और खंडहर भवन में मशरूम का उत्पादन करता है तो उसे विभाग की सब्सिडी योजना का लाभ दिया जाएगा।
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इसके लिए मशरूम उत्पादन करने वाले व्यक्ति को भवन मालिक के साथ मिलकर विभाग को एक शपथ पत्र देना होगा। कृषि मंत्री ने कहा कि प्रदेश के 285 गांवों को मशरूम गांव के रूप में विकसित किया जाएगा।

जेब में पैसा नहीं फिर भी शुरू कर सकेंगे प्रोजेक्ट

subsidy on mushroom production in ruins.

वहीं छोटे मशरूम उत्पादकों को बुनियादी ढांचा स्थापित करने के लिए 40 फीसदी अनुदान दिया जाएगा। कृषि मंत्री ने प्रदेश की सभी 22 मंडियों में जैविक उत्पादों के लिए आवंटित चार दुकानों में मशरूम और उसके उत्पाद रखे जाने एवं मशरूम उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए कलस्टर बनाने की घोषणा की। इससे पूर्व मंत्री ने मशरूम उत्पादन पर कई किसानों को पुरस्कृत किया।

समारोह में पौड़ी विधायक सुंदर लाल मंदरवाल, विधायक उमेश शर्मा, निदेशक बागवानी मिशन डॉ. बीएस नेगी, कृषि निदेशक सीएस मेहरा, निदेशक बीज प्रमाणिकरण दमयंती रावत, मंडी परिषद के अध्यक्ष आनंद, नृपेंद्र चौहान, अरुण पांडे आदि मौजूद थे। कार्यक्रम का संचालन बागवानी मिशन की डॉ. सुरभि पांडे ने किया।

यदि आपकी जेब में पैसा नहीं है, बावजूद इसके आप लाखों रुपए की लागत वाले प्रोजेक्ट लगा सकेंगे। कृषि मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत के मुताबिक, सरकार जल्द ही ऐसी योजना शुरू करने जा रही है, जिसमें किसान को उद्यान एवं कृषि विभाग की सब्सिडी आधारित योजना शुरू करने में जेब से एक भी पैसा नहीं देना पड़ेगा।

इसके लिए 80 फीसदी सरकार एवं 20 फीसदी सहकारी या फिर कोई अन्य बैंक ऋण के रूप में देगा। सरकार की ओर से इस योजना को शुरू करने के लिए बैंकों से बात चल रही है।

अब उत्तराखंड का होगा अपना लोगो

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कृषि मंत्री ने कहा कि प्रदेश का कोई भी उत्पाद यदि प्रदेश के बाहर जाएगा तो उसका अपना लोगो होगा। जिससे यह पता चलेगा कि यह उत्तराखंड का उत्पाद है। उन्होंने कहा कि बड़े दुर्भाग्य कि बात है कि अब तक प्रदेश का अपना लोगो नहीं है और हिमाचल की पेटियों पर प्रदेश का सेब बिक रहा है।

इन उत्पादकों को किया पुरस्कृत
कृषि मंत्री ने मशरूम उत्पादन के क्षेत्र में बेहतर कार्य पर लच्छीवाला देहरादून के विजय कुमार सावन, कंडारा कर्णप्रयाग चमोली की दिव्या रावत, प्रेमराजपुर रुड़की के कुंवर पाल सैनी, छरबा देहरादून की हिरेशा वर्मा, थौलधार टिहरी के अतर सिंह, जोशीयाड़ा उत्तरकाशी के अर्जुन सिंह, सल्ला रौतेला अल्मोड़ा के हरीश जोशी, देवाल चमोली के गोविंद सिंह, ऊधमसिंह नगर के चंद्र प्रकाश और शुभम भट्ट, नैनीताल के बलवंत सिंह और पीयूष भारद्वाज को पुरस्कृत किया।

संगोष्ठी में किसानों ने गिनाई समस्याएं
किसान भवन में मशरूम उत्पादन पर आयोजित संगोष्ठी में किसानों ने समस्याएं गिनाईं। वहीं मशरूम उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए कुछ सुझाव भी दिए। किसान त्रिलोक सिंह बिष्ट ने कहा कि मशरूम उत्पादन के लिए बड़े प्लांटों को सब्सिडी दी जाती है, लेकिन छोटे किसानों को प्लांट लगाने पर सहायता नहीं मिलती।

किसान गुरुप्रीत सिंह ने कहा कि बड़े प्लांट कहा हैं, इसे चिह्नित किया जाए। वहीं कुछ किसानों का कहना था कि कुछ लोगों में मशरूम के जहरीले होने की भ्रांतियां हैं। विभाग को पहल कर इसे दूर करने के लिए आगे आना चाहिए। सम्मेलन में कुछ किसानों ने उद्यान विभाग द्वारा फलों के अच्छे पौधे न मिलने की समस्या रखी।

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