विद्यालय भवन होने के बावजूद ट्रॉली के नीचे पढ़ रहे स्कूली बच्चे, जानिए क्यों
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उत्तराखंड में शिक्षा व्यवस्था के तमाम वादे करने वाली सरकार को हकीकत ये तस्वीर बयां कर रही है। ये बच्चे ट्रॉली के नीचे पढ़ने को मजबूर हैं। विद्यालय भवन है, लेकिन बच्चे यहां क्यों पढ़ रहे हैं। आप खुद ही जान लीजिए...
गांव रामजीवनपुर स्थित राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय का नवनिर्मित भवन हस्तांतरित न होने से छात्र खुले आसमान के नीचे पढ़ रहे हैं। मंगलवार को भीषण गर्मी के कारण छात्रों ने पंचायत घर परिसर में खड़ी ट्रॉली के नीचे बैठकर पढ़ाई की।
गांव रामजीवनपुर प्राथमिक विद्यालय था। दो साल पहले उच्चतर माध्यमिक विद्यालय की घोषणा की गई। इसके लिए दो करोड़ 27 लाख रुपये की लागत से भवन का निर्माण किया गया। पिछले दिनों नवनिर्मित भवन में दरार पड़ने का मामला चर्चाओं में रहा।
एसडीएम सहित अन्य अधिकारियों ने मौका मुआयना कर मुर्गा जाली डालकर दरारों को ठीक कराया। नवनिर्मित भवन में बिजली कनेक्शन और मिट्टी भरान का कार्य अभी शेष है। भवन के हस्तांतरित नहीं होने से पंचायतघर में 9-10 की कक्षाएं चल रही हैं।
पूर्व प्रधान बाबूराम तोमर ने कक्षा चलाने के लिए अपना एक कमरा दिया था। दो दिन पहले उन्होंने कमरा खाली करा लिया, जिससे 6, 7 और 8 की कक्षाएं खुले में लग रही हैं।
मंगलवार को भीषण गर्मी के चलते छात्र-छात्राओं ने पंचायत घर के मैदान में खड़ी ट्राली के नीचे बैठकर पढ़ाई की। इधर, प्रधान कस्तूरी देवी ने कहा कि विद्यालय भवन हस्तांतरित न होने से बच्चों को दिक्कत हो रही है।
शिक्षाधिकारी बाजपुर हवलदार प्रसाद खंड का कहना है कि विद्यालय के नवनिर्मित भवन को हैंडओवर करने के लिए निर्माण कर रही कार्यदायी संस्था से बातचीत हुई है। बीस दिन के भीतर बिजली कनेक्शन, मिट्टी भरान और लिफ्ट का कार्य पूरा होने पर भवन हस्तांतरित हो जाएगा।