उत्तराखंड में यूथ का कांग्रेस से हुआ 'ब्रेकअप'
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उत्तराखंड छात्र राजनीति ने कांग्रेस को झटका दिया है। युवाओं के रुझान ने कांग्रेस को भविष्य की चिंता में डाल दिया है।
मुख्यमंत्री हरीश रावत और प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (डूसू) चुनाव के नतीजों में अपना प्रभाव नहीं डाल सके जिसके लिए उन्हें केंद्रीय नेतृत्व ने बुलाया था।
वहीं गढ़वाल के महाविद्यालयों के छात्रसंघ चुनाव में भी एनएसयूआई के हाथ कुछ खास नहीं लगा। कुमाऊं विश्वविद्यालय से जुड़े कॉलेजों में अभी चुनाव होने हैं।
राजधानी देहरादून जहां से छात्र राजनीति करवट लेती है वहां के लगभग सभी कॉलेजों में एनएसयूआई का बुरा प्रदर्शन रहा है। देहरादून के डीएवी, एसजीआरआर (महासचिव जीती), एमकेपी (नामांकन ही नहीं भरा), राजकीय महाविद्यालय डोईवाला और डाकपत्थर में एनएसयूआई को हार मिली है।
एबीवीपी का परचम
डीएवी के चुनाव में नामांकन के दौरान कांग्रेस के दो विधायक राजकुमार और उमेश शर्मा काऊ ने अहम भूमिका निभाई। वहीं मुख्यमंत्री के बेटे आनंद रावत भी डीएवी चुनाव के सीधे तौर पर जुड़े थे।
सिर्फ देहरादून नहीं गढ़वाल की छात्र राजनीति में महत्व रखने वाले हेमवती नंदन बहुगुणा विश्वविद्यालय छात्र महासंघ के प्रमुख चारों पदों पर भी एबीवीपी का परचम लहराया है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष किशोर उपाध्याय भी मानते हैं कि छात्र संघ चुनावों में कुछ गलतियां रह गई हैं। देहरादून के डीएवी कॉलेज की हार को प्रदेश अध्यक्ष कॉलेज प्रशासन की मिलीभगत के रूप में भी देखते हैं। उनका कहना है कि हार के कई फैक्टर रहे हैं।
BJP के लिए छात्रसंघ चुनाव बना मिशन
तीन उपचुनाव और पंचायत की हार के बाद भाजपा ने छात्रसंघ चुनाव को मिशन के रूप में लिया। बावजूद एनएसयूआई ने पहाड़ के कई महाविद्यालयों में जीत हासिल की है।
छात्र राजनीति बाकी चुनाव से अलग है बावजूद जहां हारे हैं वहां अगले साल मजबूती से प्रयास करेंगे। प्रदेश की छात्र राजनीति में आर्यन ग्रुप नाम से भी कई जगहों पर छात्रनेता सामने आए हैं।
डीएवी कॉलेज में महासचिव, नई टिहरी पीजी और कोटद्वार में एनएसयूआई और एबीवीपी की विचारधारा से अलग आर्यन ग्रुप के छात्र नेताओं को जीत हासिल हुई है।
दरअसल प्रदेश में कुछ सालों में ऐसे छात्र नेता भी सामने आ रहे हैं जो आर्यन ग्रुप के नाम पर अलग पहचान पा रहे हैं।