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सीएम जनता दरबार प्रकरण: काश सिस्टम ने सुन ली होती 25 साल से 'वनवास' काट रही उत्तरा की फरियाद

Sat, 30 Jun 2018 09:19 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Updated Sat, 30 Jun 2018 09:19 AM IST
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struggle of uttara pant bahuguna teacher who suspended by uttarakhand cm
उत्तरा पंत बहुगुणा - फोटो : ANI

सीएम के जनता मिलन कार्यक्रम में बृहस्पतिवार को जो कुछ हुआ, उसके लिए सरकारी सिस्टम भी कम जिम्मेदार नहीं है।

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25 वर्ष दुर्गम में सेवा देने और 2015 में पति की मौत के बाद तबादले के लिए चक्कर काट रही उत्तरा पंत ने जो कुछ किया, उसे बड़े पैमाने पर शिक्षकों का समर्थन मिल रहा है। सोशल मीडिया पर उत्तरा के समर्थन में शिक्षक लिख रहे हैं कि अगर सिस्टम ने उनकी सुन ली होती तो शायद ऐसा कोई प्रकरण होता ही नहीं। 

बृहस्पतिवार को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत के जनता मिलन कार्यक्रम में हंगामा करने वाली उत्तरा पंत पिछले करीब तीन वर्षों से तबादलों के लिए अधिकारियों के चक्कर काट रही हैं।

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2015 में पति की मौत के बाद से लगातार अधिकारियों से फरियाद लगा रही हैं उत्तरा

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उत्तरा पंत बहुगुणा - फोटो : amar ujala
उत्तरा की मानें तो वर्ष 2015 में पति की मौत के बाद से वह लगातार अधिकारियों से फरियाद लगा रही हैं। हर स्तर पर उन्होंने अपील की लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। कुछ दिन पहले भी उन्होंने अधिकारियों से मुलाकात की, जहां से उन्हें मायूस होकर लौटना पड़ा।

प्रकरण के बाद से सोशल मीडिया पर शिक्षक उनके पक्ष में खड़े हो गए हैं। शिक्षकों ने शिक्षिका के व्यवहार को गलत ठहराया लेकिन सीएम का भी समर्थन नहीं किया। फेसबुक पर शिक्षकों ने लिखा कि यह सड़-गल चुके सिस्टम की नाकामी का सबसे बड़ा उदाहरण है। 

विशेष छूट का प्रावधान
प्रदेश में बनाए गए तबादला एक्ट में दुर्गम की सेवा पूरी कर चुके कर्मचारियों के लिए विशेष छूट का प्रावधान है। उन्हें अनुरोध के आधार पर दुर्गम से सुगम में तबादले का लाभ दिया जा सकता है। वहीं, विधवाओं को इसमें प्राथमिकता दी जाती है। 55 वर्ष से अधिक आयु की महिला कर्मियों को भी तबादलों में छूट का लाभ दिया जाता है।

1993 उत्तरकाशी के दुर्गम विद्यालय में हुई थी नियुक्ति

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उत्तरा पंत बहुगुणा - फोटो : amar ujala
उत्तरा पंत बहुगुणा की पहली नियुक्ति 1993 में राजकीय प्राथमिक विद्यालय भदरासू मोरी उत्तरकाशी के दुर्गम विद्यालय में हुई थी।

अगले साल उन्हें उत्तरकाशी में ही चिन्यालीसौड़ के धुनियारा प्राथमिक विद्यालय में तैनात कर दिया गया जो सड़क से 5-6 किमी. की खड़ी चढ़ाई पर स्थापित है। वर्ष 1994 से सात-आठ साल तक वह जगड़गांव दुगुलागाड़ में तैनात रही तथा वर्ष 2003 से 2015 तक यहां तैनात रहने के बाद उन्हें उत्तरकाशी के नौगांव में जेस्टवाड़ी प्राथमिक विद्यालय में स्थानांतरित कर दिया गया।

वर्ष 2015 में पति की मृत्यु होने के बाद अध्यापिका लगातार बच्चों के साथ देहरादून ट्रांसफर के लिए प्रयास कर रही है, किंतु तत्कालीन मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक, विजय बहुगुणा, हरीश रावत से लेकर त्रिवेंद्र सिंह रावत तक ने उनकी एक न सुनी।
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