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डाकपत्थर बैराज: मजबूती ही बन गई कमजोरी
मनीष चंद्र भट्ट/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Mon, 24 Apr 2017 03:19 PM IST
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dakpathar barrage
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10 साल बाद डाक पत्थर बैराज की मरम्मत की भी गई तो इसकी गुणवत्ता पर सवालिया निशान लग गया है।
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बैराज से जलविद्युत परियोजनाओं के लिए पानी छोड़े जाने से पहले ही इसके गेटों पर लगे एपोक्सी और सीमेंट उखड़ने लगे। एपोक्सी उखड़ने का कुछ कर्मचारियों ने बाकायदा वीडियो भी बना लिया है। एपोक्सी का इस्तेमाल निर्माण कार्य को मजबूती देने के लिए किया जाता है।
उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड (यूजेवीएनएल) ने आसान और डाक पत्थर बैराज का नवीनीकरण कार्य गत 20 मार्च को शुरू किया था। इसके लिए करीब कुल 110 मेगावाट क्षमता की कुल्हाल, ढकरानी और ढालीपुर जल विद्युत परियोजनाओं पर क्लोजर लिया गया। विश्व बैंक की ओर से मिले 40 करोड़ रुपये से नवीनीकरण का कार्य हुआ। इसमें बैराज से लीकेज रोकने के लिए सभी गेट पर सीमेंट के साथ एपोक्सी लगाया गया।
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सिर्फ सीमेंट में लीकेज की ज्यादा संभावना रहने के कारण एपोक्सी लगाना तय हुआ था। इसके बावजूद एपोक्सी के उखड़ने से गुणवत्ता पर सवाल उठ खड़े हुए हैं। वहीं, बैराज से पूरा रेत भी साफ नहीं किया गया है। रविवार को यूजेवीएनएल ने इन्हीं परिस्थितियों में बैराज से पानी छोड़ना शुरू कर दिया है। सोमवार से तीनों परियोजनाओं में उत्पादन शुरू होने की उम्मीद भी है। इन हालातों में जल विद्युत परियोजनाओं में उत्पादन पर असर पड़ना स्वाभाविक है। इस संबंध में मुख्यमंत्री से भी शिकायत की गई है।
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‘बैराज नवीनीकरण के कार्य में कई स्तर पर अनियमितता सामने आ रही है। एपोक्सी उखड़ने की बाकायदा वीडियो भी बनाई गई है। अब पानी छोड़ने के बाद प्रबंधन इसे झुठलाने की कोशिश कर रहा है। बैराज में रेत भी ठीक से साफ नहीं हुआ है। इससे निगम को भारी नुकसान हो रहा है। मामले की जांच की जानी जरूरी है।’
-राकेश शर्मा, प्रांतीय अध्यक्ष ऊर्जा कामगार संगठन
‘कार्य की गुणवत्ता में कहीं कोई कमी नहीं की गई है। यह कार्य वर्ल्ड बैंक की फंडिंग से हुआ है। वर्ल्ड बैंक की टीम दो बार इंस्पेक्शन कर के चली गई है। टीम ने इस कार्य की वीडियोग्राफी भी की है। कुछ लोग व्यक्तिगत रुचि के चलते इस तरह के सवाल उठा रहे हैं।’
-एसएन वर्मा, प्रबंध निदेशक यूजेवीएनएल