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न काम, न काज बस परेशानी
अमर उजाला, देहरादून
Updated Fri, 18 Oct 2013 08:47 AM IST
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उत्तराखंड में दो लाख सरकारी कर्मचारियों के अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाने से गुरुवार को जनता को परेशानी उठानी पड़ी।
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सरकार को ताकत का अहसास कराया
इससे जनता के काम नहीं हो पाए। राजधानी में कर्मचारियों ने परेड ग्राउंड में जोरदार प्रदर्शन कर सरकार को ताकत का अहसास कराया। लैब टेक्नीशियनों की हड़ताल की वजह से पैथोलाजी जांचें नहीं हुईं। दवा में मिलने में भी दिक्कत हुई।
वहीं, खाद्य निगम वालों ने भी मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। ऊर्जा निगम कर्मी भी मांगों को लेकर दिवाली पर आंदोलन की तैयारी में दिख रहे हैं। उधर, राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद ने मांगें न माने जाने पर आगामी 21 अक्तूबर से सभी आवश्यक सेवाएं ठप रखने का ऐलान किया है।
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इसी दिन सचिवालय कूच भी होगा। पहले दिन हड़ताल का असर विकास भवन, मंडी, एमडीडीए, व्यापार कर, आईटीआई, तहसील, समाज कल्याण, उद्यान, कृषि और सहकारिता आदि विभागों में असर दिखा-
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जिला उद्यान अधिकारी कार्यालय
दोपहर 12 बजे
केवल दो मिनिस्टीरियल कर्मी महिलाएं फाइलें निपटाती दिखीं। जिला उद्यान अधिकारी अमर सिंह भी कार्यालय में नहीं थे। योजनाओं की जानकारी लेने वाले बैरंग लौटे।
पशु चिकित्सा अधिकारी कार्यालय
दोपहर 12.10 बजे
मुख्य प्रसार अधिकारी आरपी डिमरी, अपर संख्याधिकारी कमलेश सिंह भंडारी और पशु चिकित्सालय से जुड़े कई अधिकारी, कर्मचारी हड़ताल में थे। चारा विकास एवं अन्य योजनाओं को जानने के इच्छुक लौटते रहे।
मनरेगा प्रकोष्ठ कार्यालय
दोपहर 12.15 बजे
कार्यालय में कुछ महिला कर्मी फाइलें निपटा रही थीं, जबकि कार्यालय की अन्य सीटें खाली थी। कोई रोजगार या पारिश्रमिक की जानकारी देने वाला नहीं था।
जिला ग्राम्य विकास अधिकारी कार्यालय
दोपहर 12.30 बजे
कार्यालय का दरवाजा बंद था और यहां एक भी अधिकारी, कर्मचारी मौजूद नहीं था। लोग दरवाजे पर ताला लटका देख लौटते रहे। ग्राम्य विकास से जुड़े हल चाहने वाले बैरंग लौटे।
किसानों पर सबसे ज्यादा असर
हड़ताल का सबसे अधिक असर किसानों के लिए चलाई जाने वाली योजनाओं पर पड़ा है। 19 से 29 अक्तूबर तक प्रदेशभर में प्रस्तावित कृषक महोत्सवों की तैयारी नहीं हो सकी है। हड़ताल लंबी चली तो इस बार महोत्सव नहीं हो सकेंगे। इससे किसानों को बीज, कृषि यंत्र आदि का वितरण नहीं किया जा सकेगा।
मुख्य सचिव ने शुक्रवार को हमें वार्ता के लिए बुलाया है। हम बातचीत के लिए जाएंगे, लेकिन आंदोलन तब तक जारी रखा जाएगा जब तक शासनादेश जारी नहीं हो जाता।
- अरुण पांडे, राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद
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