1983 से लगातार जारी है वकीलों की हड़ताल
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हाईकोर्ट के सख्त रुख के बावजूद अधिवक्ता दून में हाईकोर्ट बैंच की मांग पर सालों से चली आ रही शनिवार की हड़ताल खत्म करने का तैयार नहीं है। अधिवक्ता सस्ते और सुलभ न्याय के लिए बैंच को जरूरी मानते हैं। अधिवक्ताओं का कहना है कि हड़ताल उनका कानूनी अधिकार है।
दून बार एसोसिएशन का कहना है कि अब इस मसले पर आम सभा में फैसला किया जाएगा। साथ ही बार काउंसिल ऑफ उत्तराखंड (बीसीयू) से भी सुझाव मांगा जाएगा।
जिले में देहरादून के अलावा विकासनगर, ऋषिकेश, मसूरी में 1983 से शनिवार की हड़ताल चली आ रही है। वकीलों का कहना है कि हाईकोर्ट की बेंच न होने से वादकारियों को पहले इलाहाबाद और राज्य गठन के बाद नैनीताल के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
दून बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव शर्मा का कहना है कि आम सभा का जो फैसला होगा उसी के अनुरूप कार्य किया जाएगा। वहीं बीसीयू के अध्यक्ष हरि सिंह नेगी बताते हैं कि वे अकेले इस मसले पर कोई फैसला नहीं ले सकते। उन्होंने अभी हाईकोर्ट का फैसला नहीं देखा है। इस मसले पर आम सभा में फैसला किया जाएगा।
हड़ताल के समर्थन में वकीलों के अपने तर्क
बीसीयू के पूर्व अध्यक्ष योगेंद्र तोमर का कहना है कि वकीलों की समस्याओं का शीघ्र निस्तारण हो जाए तो हड़ताल होगी ही नहीं। दून बार एसोसिएशन के सह सचिव भानू प्रताप सिसौदिया कहते हैं कि शनिवार को हड़ताल पूरी सख्ती के साथ लागू की जाएगी।
कोई वकील ऐसा नहीं है जो काम न करना चाहता हो। काम न करने से वकील को ही नुकसान होता है। शनिवार को जनहित में ही वकील कार्य से विरत रहते हैं।
-पृथ्वीराज चौहान, पूर्व अध्यक्ष, बार काउंसिल ऑफ उत्तराखंड
वादकारी से फीस लेकर हड़ताल पर रहना सरासर गलत है। यह वादकारी के साथ वादाखिलाफी है, अनैतिक और अपराध है। हैरानी की बात यह है कि कुछ मजिस्ट्रेट भी शनिवार को कोर्ट में नहीं बैठते।
-शिव चरण सिंह रावत, पूर्व सचिव, दून बार एसोसिएशन
न्याय के लिए वादकारियों को नैनीताल न जाना पड़े और उन्हें सस्ता व सुलभ न्याय मिले। इसके लिए वकील हड़ताल पर हैं। वे कर्मचारी नहीं है, किसी से वेतन नहीं ले रहे हैं, वे जनहित में कार्य से विरत रह सकते हैं।
-आरपी पंत, वरिष्ठ अधिवक्ता
मांग मानते ही खत्म हो जाएगी हड़ताल
दून, हरिद्वार, ऋषिकेश, नरेंद्रनगर या विकासनगर में किसी भी जगह हाईकोर्ट की बैंच स्थापित होनी चाहिए। हड़ताल वकीलों का संवैधानिक अधिकार है। जिस दिन हमारी यह मांग पूरी हो जाएगी, हड़ताल भी उसी दिन खत्म हो जाएगी।
-रघुवीर सिंह कठैत, सचिव, दून बार एसोसिएशन
हाईकोर्ट की बैंच दून में न होने से कई वकील हाईकोर्ट में प्रैक्टिस नहीं कर पा रहे हैं। हड़ताल पर रोक के फैसले के मामले को 22 नवंबर को नैनीताल में बार काउंसिल की होने वाली बैठक में उठाया जाएगा।
-रजिया बेग, पूर्व अध्यक्ष, बार काउंसिल ऑफ उत्तराखंड
दून में 68 हजार मुकदमे लंबित
दून जिले में विभिन्न अदालतों में 68,117 वाद लंबित हैं। इनमें 10882 दिवानी और 57235 फौजदारी वाद हैं। कुछ मामले तो 15 से 20 साल से लंबित हैं।