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बातचीत के बाद भी नहीं निकला हड़ताल का हल

Fri, 08 Aug 2014 08:45 AM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून Updated Fri, 08 Aug 2014 08:45 AM IST
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strike in uttarakhand

उत्तराखंड को हड़ताली प्रदेश की छवि से निकालने की सरकार की छटपटाहट के बाद भी हड़ताल से निजात मिलती नहीं दिख रही है।

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हड़ताली कर्मचारियों के प्रति नरम मुख्यमंत्री
शुरुआती सख्ती के बाद हड़ताली कर्मियों के प्रति मुख्यमंत्री का रवैया हड़ताली कर्मचारियों के प्रति नरम है।

कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान के लिए वित्त मंत्री इंदिरा हृदयेश की अगुवाई में मुख्यमंत्री द्वारा गठित समिति की एक बार बैठक भी नहीं हो पाई है।

उधर, सीएम ने कर्मचारियों से एक बार फिर हड़ताल का रास्ता न अख्तियार करने की अपील करते हुए प्रदेश की वित्तीय सुधारने के लिए डेढ़ साल की मोहलत मांगी है।

वित्तमंत्री इंदिरा हृदयेश का कहना है कि कमेटी के गठन के बाद से ही प्रदेश में चुनावी आचार संहिता लागू रही जिसके चलते न तो सरकार कोई घोषणा कर सकती थी और न ही समाधान के रूप में लाभ पहुंचा सकती थी।

स्थायी समाधान के प्रति कृतसंकल्प है सरकार

अगले सप्ताह तक संबंधित विभागों के सचिवों और कर्मचारी संघों से बातचीत के बाद कमेटी किसी निष्कर्ष पर पहुंचेगी। सरकार स्थायी समाधान के प्रति कृतसंकल्प है।
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मुख्यमंत्री हरीश रावत कड़े फैसले लेने की बात कहते रहे हैं लेकिन हड़ताली कर्मचारियों के प्रति उनके रुख में भी कोई कड़ाई नहीं दिखती है।

जबकि कुर्सी संभालते ही सीएम ने हड़ताली प्रदेश की छवि को बदलने का संकल्प और कर्मचारी नेताओं से दो टूक बात की थी जो अब अपील में बदल गई है।

मुख्यमंत्री ने बृहस्पतिवार को मीडिया से बातचीत में कहा कि सरकार कर्मचारियों और उनके अधिकारों का सम्मान करती है। हमारा आग्रह है कि मांगों को मनवाने के लिए पहले सभी अन्य रास्ते देखें, अगर कुछ नहीं होता है तब हड़ताल करें।
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कर्मचारी अपनी समस्याओं के समाधान का  मौका दें। उनके मौजूं अधिकारों का स्वागत है, लेकिन 18 साल से एक जगह जमे किसी असलहा बाबू का तबादला होने पर हड़ताल करने का फैसला करने पर कर्मचारियों को भी सोचना पड़ेगा।

मुख्यमंत्री ने बताया कि सचिवालय में नए अनुभागों के गठन पर मैंने कर्मचारी नेताओं से ही पूछा है कि ये बताएं कि जो अनुभाग बनेंगे वहां काम क्या होगा। पद का सृजन करें तो काम भी निकालकर दें।


कर्मचारी राज्य की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के लिए एक से डेढ़ साल का समय दे दें ताकि केंद्र से लागू होने वाले 7वें वेतनमान केसमय राज्य अपने कर्मचारियों को तत्काल बढ़ा हुआ वेतन दे सके। ऐसे ही राज्य हड़ताल में उलझा रहेगा तो उन्हें भी कठिनाई आएगी।
- हरीश रावत, मुख्यमंत्री

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