तीर्थनगरी हरिद्वार में भी रहे हैं गणतंत्र के कई प्रहरी
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हरिद्वार में भी गणतंत्र के कई प्रहरी रहे हैं। वे न होते तो विख्यात औद्योगिक प्रतिष्ठान बीएचईएल और आईडीपीएल इस क्षेत्र में न आते, जिन्होंने प्रथम प्रधानमंत्री नेहरू के कंधे से कंधा मिलाकर काम किया, गणतंत्र उनका भी ऋणी है।
प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के घनिष्ठ मित्र हीरा वल्लभ त्रिपाठी और शांति प्रपन्न शर्मा ने गणतंत्र की घोषणा के बाद हरिद्वार बनाने का कारनामा कर दिखाया।
राज्य सभा सदस्य हरिद्वार के हीरा वल्लभ त्रिपाठी जब नेहरू से भेल हरिद्वार के लिए ले आए तो शांति प्रपन्न शर्मा ने जिद कर हरिद्वार और ऋषिकेश के बीच आईडीपीएल मांग लिया।
हरिद्वार को निखारने का काम चेयरमैन के रूप में सरदार रामरक्खा, पन्ना लाल भल्ला, बलवंत सिंह, आत्माराम विद्याकुल, सुरजी बाबू, आनंद प्रकाश शर्मा, हरि दत्त बहुगुणा आदि अनेक महापुरुषों ने किया। दून के सांसद महावीर त्यागी भी नेहरू के मुंह लगे थे।
तिवारी ने सिडकुल देकर बदला हरिद्वार का नक्शा
जब सांसद महावीर त्यागी को पता चल कि हीरा वल्लभ त्रिपाठी और शांति प्रपन्न दो विशाल प्रतिष्ठान अपने क्षेत्र में ले गए हैं तो महावीर त्यागी ने भी दून के लिए ओएनजीसी मांग लिया। उत्तराखंड के लिए ये तीनों प्रतिष्ठान किसी न किसी रूप में मील का पत्थर बने हुए हैं।
हरिद्वार को देने में पूर्व मुख्यमंत्री एनडी तिवारी ने भी कमी नहीं की। यूपी में रहते हुए उन्होंने ही हरिद्वार को पहले तहसील और फिर जनपद का दर्जा दिया।
यही नहीं उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के रूप में तिवारी ने सिडकुल देकर नगर का मानचित्र बदल दिया। अतीत में महामना मालवीय और स्वामी श्रद्धानंद ने गंगा तट की तकदीर बदलने का काम किया था। भारतीय गणतंत्र की घोषणा के बाद अनेक रक्षक इस क्षेत्र का उत्थान करने में जुटे रहे।