ये है सच्चा देशभक्त, देशभक्ति देख पाक खिलाड़ी का दिल भी पसीजा
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जो देश आज हमसे हर वक्त युद्ध के तैयार खड़ा है वहीं के बाशिंदे ने मदद को आगे हाथ बढ़ाया और जब अमेरिका जैसे देश ने लाखों का ऑफर देकर अनुबंध की बात की तो देशहित में उसे ठुकरा दिया। 104 डिग्री बुखार शरीर को तो तोड़ रहा था, लेकिन जांबाज के हौंसलों को नहीं तोड़ सका।
अमेरिका के कैलीफोर्निया शहर में हुए वर्ल्ड पुलिस एंड फायर गेम में दो पदक जीतकर देश और उत्तराखंड का नाम रोशन करने वाले मुकेश पाल प्रदेश में खेल और खिलाड़ियों के प्रति सरकार की बेरुखी से दुखी हैं। सोमवार को अमर उजाला पहुंचे पाल ने प्रतियोगिता के दौरान हुए अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए उनके पास प्रायोजक तक नहीं थे, ऐसे में उनका पुलिस विभाग आगे आया और उनके अमेरिका जाने की व्यवस्था की गई। यहां और वहां दिन रात के अंतर की वजह से वह बीमार पड़ गए। उन्हें 104 बुखार हो गया, लेकिन उन्होंने डोप टेस्ट में फेल होने और भारत की बदनामी के डर से कोई दवा नहीं ली।
सोमवार को मुकेश पाल का अमर उजाला कार्यालय पहुंचे। इसके बाद उनसे बातचीत का सिलसिला शुरू हुआ तो उन्होंने बताया कि प्रतियोगिता से पहले कैलीफोर्निया पहुंचने पर वह बीमार हो गए थे, उस वक्त पाकिस्तानी खिलाड़ी आदिल राणा और बांग्लादेशी खिलाड़ी अलबेग ने उन्हें काफी प्रेरित किया और उनकी मदद की। डोप टेस्ट के डर से 104 बुखार में भी दवा नहीं लेना ही ठीक समझा। इसलिए इन दोनों एशियाई साथियों ने घरेलू दवाओं से उनका इलाज करने में मदद की।
मुकेश ने बताया कि यूएसए के ग्रीन क्लब ने उन्हें सालाना 24 लाख के ऑफर के साथ तीन साल का अनुबंध करने की पेशकश की है, लेकिन, उन्होंने देशहित में अभी तक उन्हें हां नहीं कहा। भविष्य को लेकर उनका कहना है कि अभी उनका पूरा फोकस अपने प्रदर्शन को निखारने पर है।
खिलाड़ी मकेश पॉल ने करियर से लेकर प्रदेश में खेलों के भविष्य पर बेबाक राय रखी
खिलाड़ी मुकेश पाल ने अपने करियर से लेकर प्रदेश में खेलों के भविष्य पर बेबाक राय रखी। एशियन गेम्स में 2003 में कास्य पदक जीतकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी धमक जमाने वाले मुकेश ने 2008 में खेल कोटे से पुलिस सेवा ज्वाइन की। इसी दौरान 2008-09 में ऑल इंडिया पुलिस गेम्स में गोल्ड मेडल जीतकर अपने अधिकारियों को विश्वास जीता।
2009-10 में पुणे में हुई इंटरनेशन प्रतियोगिता में गोल्ड जीता, 2011 में लंदन ओपन में एक रजत और एक कांस्य पदक अपने नाम किया और फिर 2013 वर्ल्ड पुलिस गेम में रजत पदक के साथ फिर उन्होंने धमाकेदार एंट्री मारी। पुलिस गेम 2015 में एक रजत और एक कांस्य पदक अपने नाम किया। 2017 में अमेरिका में होने वाले वर्ल्ड पुलिस गेम में भाग लेने के लिए उनके पास पैसे नहीं थे, ऐसे में उनकी मदद को आगे आए नैनीताल एसएसपी जन्मेजय खंडूरी। उनके कहने पर शहर के व्यापारियों ने मुकेश को वित्तीय मदद की इसके बाद परिणाम सबके सामने है। वहां उन्होंने दो कांस्य पदक अपने नाम किए।
मंत्री की बेरुखी से पहुंची जांबाज के दिल को ठेस
बकाया ही चुका दे सरकार
मुकेश ने बताया कि 2015 में रजत और कांस्य पदक जीतने पर तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत ने पुरस्कार के रूप में बड़ी राशि देने की घोषण की थी, लेकिन वह घोषणा आज तक पूरी नहीं हुई। तैयारियों को लेकर उन्होंने बताया कि उनका सारा वेतन खुराक में ही चला जाता है। सिर्फ खुराक पर महीने का उनका खर्च से 25 से 30 हजार आता है।