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नेहरू ने थपथपाई थी पीठ, अब तो नेता पूछते नहीं
मनमीत रावत / अमर उजाला, देहरादून
Updated Sun, 06 Apr 2014 11:47 AM IST
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कुदरत ने उनके साथ इंसाफ नहीं किया तो समाज और परिवार ने भी साथ नहीं दिया।
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समाज के दिए दर्दों के साथ जिंदगी जी
कुष्ठ रोग होने पर परिवार वालों ने उन्हें रैफल होम में छोड़ दिया। तब से लेकर अब तक रोग के कष्टों और समाज के दिए दर्दों के साथ जिंदगी जी रहे हैं।
लेकिन एक बात उन्हें आज भी खुश कर देती है, वह है देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू का व्यवहार और उनकी करुणा। बताते हैं कि पंडित नेहरू ने उन्हें छुआ था और पीठ भी थपथपाई थी।
नेहरू की तुलना आज के नेताओं से करने पर वे मुंह बिचका देते हैं। कहते हैं कि अब तो सब ‘बड़े लोग’ होते हैं।ये हैं बचपन से ही रैफल होम में रहने वाले भगलू और किशनी।
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झुर्रियों से भरे दोनों के चेहरे बता देते हैं कि वे कष्टों के साथ जिंदगी का लंबा सफर काट चुके हैं। उम्र के अंतिम पड़ाव से गुजर रहे दोनों बुजुर्ग कार्यक्रम के लिए नए कपड़े पहनकर बेहद खुश थे।
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रफैल की स्थापना 1959 में हुई
भगलू बताते हैं कि दून में रफैल की स्थापना 1959 में हुई थी। मैं तभी यहां आ गया था।’ उम्र शायद 15 साल रही होगी। भगलू सोच कर बताते हैं कि रफैल को पंडित नेहरू ने जमीन दी थी।
इसके स्थापना पर वे आए। तब सभी कुष्ठ रोगी टेंट में रहते थे। पंडित जी आए और सभी का हाल पूछने के बाद पीठ थपथपाई।
किशनी बताती हैं कि पंडित नेहरू ने उन सभी को जिंदगी जीने का मंत्र दिया। हमें बाल्टी, मग और बर्तन भी दिए गए। इस पल हम अरसे बाद बेहद खुश थे। शायद इसीलिए वे पल आज भी याद हैं।
किशनी बताती हैं कि वह टिहरी के प्रतापनगर क्षेत्र के बनाली गांव की रहने वाली हैं। सोचकर बताती हैं कि शायद पांच या दस साल की उम्र रही होगी जब उनके परिवार ने कुष्ठ रोग होने पर रफैल में छोड़ दिया था।
इन बच्चों को भी सलाम
दून गर्ल्स और ब्वायज के करीब 100 बच्चे अपना जन्मदिन धूमधड़ाके से मनाते हैं, लेकिन रेस्टोरेंट या डिस्को में नहीं।
उनका यह दिन रफैल के कुष्ठ रोगियों और स्पेशल बच्चों के बीच बीतता है। जन्मदिन पर सुबह ही उस तारीख को जन्मा स्टूडेंट रफैल आकर जन्मदिन की सूचना देता है।
उसके मां-पिता कुछ मामूली बजट रफैल को देते हैं, जिससे शाम की तैयारी होती है। शाम को बच्चा रफैल में धमाचौकड़ी और मस्ती के बीच आकर जन्मदिन मनाता है। उसके जाने के बाद स्पेशल बच्चे फिर दूसरे के जन्मदिन का इंतजार करने लगते हैं।