इमरजेंसी के वक्त पार कर दी गई थी बर्बरता की हदें
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पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के कार्यकाल में लगे आपातकाल में गिरफ्तार किए गए पिथौरागढ़ में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक धर्म सिंह रावत का कहना है कि उन दिनों को याद कर आज भी वह सिहर उठते हैं। धर्म सिंह 15 महीने तक अल्मोड़ा जेल में बंद रहे। उनके साथ पत्रकार रणजीत सिंह ज्याला को भी जेल में रातें बितानी पड़ी थी।
धर्म सिंह ने बताया कि वह जून 1975 में बागेश्वर में आरएसएस के जिला प्रचारक के रूप में कार्यरत थे। 25 जून को जैसे ही आपातकाल लगा तो उन पर पुलिस का दबाव बढ़ने लगा। वह कुछ दिन बागेश्वर में नाम बदलकर भी रहे। आरएसएस के बड़े नेताओं के निर्देश पर वह पिथौरागढ़ आ गए और अंडरग्राउंड होकर आपातकाल की खिलाफत करने लगे।
वह बताते हैं कि रणजीत सिंह के साथ मिलकर ‘चिंगारी’ नाम से छोटा सा अखबार निकालते थे। अखबार में सरकार की तानाशाही को छापा जाता था। दिसंबर 1975 के अंतिम सप्ताह में पुलिस ने उनको नगर के शिव मंदिर के पास से गिरफ्तार कर लिया, तब उनकी उम्र 27 साल की थी।
उनसे पहले कई अन्य कार्यकर्ता भी जेल जा चुके थे। धर्म सिंह बताते हैं कि जेल में कैदियों के साथ अमानवीय व्यवहार होता था। कंकड़ मिले हुए सड़े चावल खिलाए जाते थे। अल्युमीनियम की प्लेट में खाना मिलता था।15 महीने बाद उनकी रिहाई हो गई।
आपातकाल के एक माह बाद गिरफ्तार हुए थे कोश्यारी
आरएसएस के कार्यकर्ता चामू सिंह भैंसोड़ा को आपातकाल लगने के ठीक एक माह बाद पिथौरागढ़ में गिरफ्तार किया गया। उसी दिन भगत सिंह कोश्यारी भी गिरफ्तार हुए। गिरफ्तार करने के बाद सबसे पहले उनको डीडीहाट लॉकअप लाया गया। फिर अल्मोड़ा जेल ले जाया गया।
ढाई महीने तक अल्मोड़ा जेल में रखने के बाद उनको इलाहाबाद की नैनी जेल भेज दिया गया। चामू सिंह और भगत सिंह कोश्यारी कुल मिलाकर 22 माह 20 दिन तक जेल में रहे। चामू सिंह गिरफ्तारी के समय मात्र 17 वर्ष के थे। तब उन्होंने इंटर पास किया था।
देवीदत्त ने भी खाई थी जेल की हवा
आरएसएस के एक सक्रिय कार्यकर्ता देवीदत्त जोशी को भी आपातकाल में गिरफ्तार होना पड़ा था। वह कहते हैं कि उन दिनों को याद करने से आज भी सिहरन सी होती है। गिरफ्तारी के बाद परिवार के लोग चिंता में डूब गए। वह कहते हैं कि किसी लोकतांत्रिक देश में इस तरह की कल्पना किसी ने नहीं की थी। वह भी 15 महीने तक अल्मोड़ा जेल में बंद रहे।
18 महीने तक जेल में रहे सुभाष छाबड़ा
आजाद भारत में 25 जून 1975 की आधी रात लगी इमरजेंसी देश के इतिहास में घनघोर अंधेरा लेकर आई। तब तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने आपातकाल की घोषणा की थी। अगले दिन 25-30 हजार लोगों को बिना किसी कारण के ही गिरफ्तार कर लिया गया था। इसके बाद देश भर में 1.50 लाख लोग पकड़े गए। यह कहना है आपातकाल का मंजर अपनी आंखों से देख चुके वरिष्ठ अधिवक्ता सुभाष छाबड़ा का।
वे बताते हैं कि वह 1975 में लखनऊ विवि के छात्रसंघ सचिव थे। उसी समय जेपी नारायण की याचिका पर तत्कालीन न्यायाधीश जगमोहन सिन्हा ने रायबरेली संसदीय क्षेत्र का चुनाव रद्द कर दिया। इस पर तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने इस्तीफा देने के बजाय देश में आधी रात को आपात काल लगा दिया।
इसी दौरान अपने साथियों समेत वह आपातकाल के खिलाफ अभियान चलाते रहे। लेकिन दो माह बाद चार सितंबर 1975 को उनको देश की स्वतंत्रता में बाधक व खतरनाक बताकर गिरफ्तार कर लिया गया। उनको जिला कारागार लखनऊ, आदर्श कारागार लखनऊ व केंद्रीय कारागार बरेली में 18 महीने रखा गया।
अधिवक्ता सुभाष छाबड़ा याद करते हुए बताते हैं कि आपात काल के दौरान मीसा नाम का एक कानून बनाया गया। इसके तहत किसी को बिना कारण बताए ही सरकार गिरफ्तार कर लेती थी। सबसे बड़ा दुर्भाग्य यह था कि सुप्रीम कोर्ट ने भी इंदिरा गांधी के फैसले को सही ठहराया। इसी मुद्दे पर देश के मुख्य न्यायाधीश रहे वाईबी चंद्रचूड़ ने खेद भी जताया था।
भारतीय लोकतंत्र के लिए धब्बा है आपातकाल
आपातकाल के दौरान विरोध प्रदर्शन करने पर अल्मोड़ा जिले के अनेक लोगों को जेल भेज दिया गया। इनमें से अधिकांश लोग अब दिवंगत हो चुके हैं लेकिन कुछ लोग अब भी जिंदा हैं। बुजुर्ग स्वतंत्रता संग्राम सेनानी देवेंद्र सनवाल भी आपातकाल के दौरान 15 दिन जेल में रहे।
अपने अनुभवों को सुनाने हुए श्री सनवाल ने बताया कि आपातकाल के विरोध में मौन जुलूस निकालने पर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था। आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र के लिए धब्बा बताया है। श्री सनवाल ने बताया कि अल्मोड़ा में उस दौर के वरिष्ठ जनसंघी नेता स्व. सोबन सिंह जीना के नेतृत्व में आंदोलनकारियों ने मौन जुलूस निकाला।
सभी के मुंह पर पट्टियां बंधी थी। एसडीएम ने धारा 144 का उल्लंघन करने पर सभी लोगों को अल्मोड़ा जेल भेज दिया। श्री सनवाल ने बताया कि जेल में भी बहुत काम कराया जाता था। उन्होंने बताया कि बंद किए गए लोगों में अधिकांश समाजवादी और आरएसएस से जुड़े लोग थे। श्री सनवाल के मुताबिक धारा 144 के उल्लंघन में बंद आंदोलनकारियों को करीब 15 दिन बाद रिहा किया गया।
मालूम हो कि स्वतंत्रता सेनानी देवेंद्र सनवाल आजादी के आंदोलन में काफी समय तक जेल में रहे। श्री सनवाल तत्कालीन प्रधानमंत्री स्व. इंदिरा गांधी द्वारा देश में आपातकाल लगाने को तानाशाही पूर्ण निर्णय बताते हैं। उन्होंने आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र के लिए धब्बा बताया है।
आपातकाल में जेल में बंद रहे प्रमुख लोग
आपातकाल में जेल में बंद रहे प्रमुख लोगों में पूर्व मंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता स्व. सोबन सिंह जीना, नैनीताल के सांसद और पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी, भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष पूरन चंद्र शर्मा, वरिष्ठ अधिवक्ता गोविंद लाल वर्मा के अलावा उक्रांद के दिवंगत नेता स्व. विपिन त्रिपाठी, भाजपा नेता स्व. गोविंद सिंह बिष्ट, गोवर्धन उप्रेती, स्व. नंदन सिंह कपकोटी, पूर्व विधायक स्व. गंगा सिंह बिष्ट, शक्ति के संपादक रहे स्व. धर्मानंद पांडे, स्व. मोती राम जोशी, स्व. हरिनंदन जोशी, बशीर अहमद, स्व. विनोद वर्मा, स्व. महेंद्र मटियानी, समाजवादी प्रताप सिंह बिष्ट, गंगा शरण, प्रो.एलसी जोशी आदि शामिल थे।