हिमालयः बदला मौसम तो घर छोड़ गए ये वन्य जीव
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हिमालय की तलहटी वाले शिवालिक क्षेत्र में जिराफ की उत्पत्ति हुई थी, लेकिन जलवायु परिवर्तन के कारण वे यहां से पलायन कर गए।
इस वक्त हिमालयी क्षेत्र में एक भी जिराफ नहीं है। इसी तरह तीन खुर वाले घोडे़ हिपेरियन की उत्पत्ति भी शिवालिक क्षेत्र में हुई थी, लेकिन जैसे ही इस क्षेत्र की जलवायु बदली हिपेरियन का अस्तित्व भी समाप्त हो गया। शिवालिक क्षेत्र में इन दोनों वन्य जीवों के एक करोड़ 20 लाख साल पुराने जीवाश्म मिले हैं।
भारतीय मानव विज्ञान सर्वेक्षण की टीम वैसे तो पुरा मानव विज्ञानी और जीवाश्म विशेषज्ञ डॉ. एआर संख्यान की अगुवाई में कपि मानव और आदि मानव के जीवाश्म खोजने के लिए शिवालिक क्षेत्र में निकली थी, लेकिन जिराफ और हिपेरियन घोड़े के जीवाश्म उनके हाथ लगे जिसने अमेरिका और एशिया के विज्ञानियों को हैरत में डाल दिया।
हिपेरियन घोड़े के भी जीवाश्म मिले
जिराफ के जीवाश्म निम्न और मध्य शिवालिक में मिले थे। इनकी जांच में पता चला कि शिवालिक के इसी क्षेत्र में जिराफ की उत्पत्ति हुई थी। लेकिन जलवायु में आए बदलाव के साथ जिराफ ने अपना अस्तित्व बचाने के लिए अफ्रीका की तरफ रुख कर लिया।
इसी दौरान भारतीय मानव विज्ञान सर्वेक्षण की टीम को हिपेरियन घोड़े के भी जीवाश्म मिले। इसकी उत्पत्ति भी इसी शिवालिक क्षेत्र में हुई। नाटे कद के इस घोड़े के तीन खुर होते थे। बाद में तीनों मिलकर एक खुर की शक्ल में आ गए। हिपेरियन घास नहीं खाता था।
पेड़ की टहनियों से पत्ती खाया करता था। विज्ञानियों की टीम को हिपेरियन के दांत, टांग आदि जीवाश्म मिले हैं। इस घोड़े की तीन नस्लें हुआ करती थीं, लेकिन जलवायु के बदलाव ने उनका अस्तित्व खत्म कर दिया। हिपेरियन को भी ठंड बर्दाश्त नहीं थी।
जो जीवाश्म मिले हैं उनके आधार पर जिराफ और हिपेरियन घोड़े की उत्पत्ति शिवालिक क्षेत्र में हुई थी। हिपेरियन का पहला जीवाश्म वर्ष 1975 में मिला था। इस पर शोध अभी जारी है।
- डॉ. एआर संख्यान, वरिष्ठ पुरा मानव विज्ञानी एवं जीवाश्म विशेषज्ञ