फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   Sterilization of 47 thousand monkeys people are turning away from agriculture due to monkeys uttarakhand news

देहरादून: 47 हजार बंदरों की नसबंदी, फिर भी कम नहीं धमाचौकड़ी, पर्वतीय क्षेत्रों में खेती से विमुख हो रहे लोग

Mon, 05 Dec 2022 01:29 PM IST
रेनू सकलानी विनोद मुसान, अमर उजाला, देहरादून
विनोद मुसान, अमर उजाला, देहरादून Published by: रेनू सकलानी Updated Mon, 05 Dec 2022 01:29 PM IST
सार

प्रदेश में वन विभाग की ओर से दिसंबर 2021 में गणना के बाद बंदरों और लंगूरों के आंकड़े जारी किए गए थे। 31 वन प्रभागों और मानव बस्तियों से सटे क्षेत्रों से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, राज्य में बंदरों की संख्या 1,10,481 और लंगूरों की संख्या 37,735 है।

विज्ञापन
Sterilization of 47 thousand monkeys people are turning away from agriculture due to monkeys uttarakhand news
बंदर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्रों में अगर लोग खेती से विमुख हो रहे, तो इसका बड़ा कारण बंदरों की धमाचौकड़ी भी है। इसके लिए सरकार के स्तर पर बंदरों की नसबंदी का फैसला लिया गया, लेकिन यह उपाय भी कारगर साबित होता नजर नहीं आ रहा है।

विज्ञापन


बीते सात सालों में अब तक 46,973 बंदरों की नसबंदी की जा चुकी है। प्रदेश में वन विभाग की ओर से दिसंबर 2021 में गणना के बाद बंदरों और लंगूरों के आंकड़े जारी किए गए थे। 31 वन प्रभागों और मानव बस्तियों से सटे क्षेत्रों से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, राज्य में बंदरों की संख्या 1,10,481 और लंगूरों की संख्या 37,735 है।
विज्ञापन


वर्ष 2015 की गणना के सापेक्ष बंदरों की संख्या में 25 प्रतिशत और लंगूरों की संख्या में 31 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। बीते सात सालों में वन विभाग की ओर से कुल 59,497 बंदरों को पकड़ा गया। इनमें 46,973 बंदरों की नसबंदी की गई, जबकि 12,524 बंदरों को बिना नसबंदी किए छोड़ दिया गया। इनमें से कई मादा थी और कई स्वास्थ्य संबंधी कारणों से इनकी नसबंदी नहीं की गई। 

विज्ञापन
विज्ञापन

2020-21 में सबसे ज्यादा बंदरों की नसबंदी
वन विभाग की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2020-21 में सबसे अधिक 19 हजार 961 बंदर पकड़े गए। इनमें से 18 हजार 501 बंदरों की नसबंदी की गई, जबकि इस साल सितंबर तक सात हजार 771 बंदरों को पकड़ा जा चुका है, जबकि दो हजार 647 बंदरों की नसबंदी की जा चुकी है। 

तीन बंदरबाड़ों में होती नसबंदी
राज्य में तीन बंदरबाड़े बनाए गए हैं, जहां नसबंदी की जाती है। इनमें पहला चिड़ियापुर (हरिद्वार वन प्रभाग), दूसरा अल्मोड़ा (सिविल सोयम अल्मोड़ा वन प्रभाग) और तीसरा रानीबाग (नैनीताल वन प्रभाग) में है। 

वर्ष 2015 में ज्यादा थे बंदर और लंगूर 
इससे पूर्व बंदरों और लंगूरों की गणना 2015 में की गई थी। तब राज्य में 1,46,432 बंदर और 54,804 लंगूरों की रिपोर्ट की गई थी।

वन विभाग की ओर से कई स्तरों पर किया जा रहा काम
प्रदेश में बीते 10 सालों से बंदरों की नसबंदी का काम किया जा रहा है। पहले के मुकाबले इनकी संख्या में 25 प्रतिशत तक की कमी आई है। बंदरों को जंगलों में रोकने के लिए वन विभाग की ओर से कई स्तरों पर काम किया जा रहा है। आने वाले दिनों में इसके सकारात्मक परिणाम दिखाई देंगे। - डॉ. समीर सिन्हा, मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक, उत्तराखंड वन विभाग 

ये भी पढ़ें...1971 के युद्ध की कहानी, वीर सैनिकों की जुबानी: मेजर जनरल खाती ने बहादुरी की स्याही से लिखी थी गौरव गाथा

बंदरों से परेशान आपदा प्रबंधन विभाग
राज्य सचिवालय परिसर में स्थित उत्तराखंड आपदा प्रबंधन विभाग भी बंदरों की धमाचौकड़ी से परेशान है। विभाग के कार्यालय से लगता एक बाग है, जहां बंदर बैठे रहते हैं। साथ ही कार्यालय परिसर में दिनभर बंदरों की धमाचौकड़ी रहती है। कार्यालय का दरवाजा खुला रहने पर कई बार बंदर घुस जाते हैं। आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अधिशासी निदेशक पीयूष रौतेला ने बताया कि वह शीघ्र ही वन विभाग को पत्र लिखने जा रहे हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed