फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   state government neglect martyr ranjeet singh family

आठ वर्ष से गुमनामी के अंधेरे में जी रहा है कारगिल शहीद का परिवार

Mon, 24 Jul 2017 11:57 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,देहरादून
ब्यूरो/अमर उजाला,देहरादून Updated Mon, 24 Jul 2017 11:57 AM IST
विज्ञापन
state government neglect martyr ranjeet singh family
martyr ranjeet singh and family

जिन कारगिल शहीदों के नाम सरकार शौर्य दिवस मनाने जा रही है, उनका परिवार ही गुमनामी के अंधेरे में खोता जा रहा है। एक शहीद के परिजन पिछले आठ वर्षों से शौर्य दिवस जैसे आयोजनों में खुद को शामिल करने और शहीद को सम्मान देने का अनुरोध कर रहे हैं, लेकिन सरकार और सैनिक कल्याण से जुड़े विभाग उन्हें कोरा आश्वासन देकर टरका रहे हैं। परिवार का आरोप है कि कारगिल युद्ध के समय की गई एक भी घोषणा आज तक सरकार ने पूरी नहीं की है।

विज्ञापन


मामला गैंरसैण निवासी कारगिल शहीद स्व. रणजीत सिंह के परिवार से जुड़ा है। 30 जून 1999 को गैरसैंण, चमोली के बासीसैंण, अक्सवाड़ा निवासी 24 वर्षीय राइफलमैन रणजीत सिंह कारगिल युद्ध में पाकिस्तानी सेना से लोहा लेते हुए शहीद हो गए।
विज्ञापन


सरकार ने उनके सम्मान में दाडिमडाली से अक्सवाड़ा होते हुए रोडिया में नागचूला से मिलने वाली सड़क और राजकीय इंटर कॉलेज रोडिया का नामकरण करने की घोषणा की। साथ ही शहीद के परिवार को पेट्रोल पंप आवंटित करने की भी घोषणा की। लेकिन 18 वर्ष बाद भी घोषणाएं पूरी नहीं हुईं।

विज्ञापन
विज्ञापन

बेटी ने नहीं देखा पिता का चेहरा

state government neglect martyr ranjeet singh family
martyr ranjeet singh wife

2009 में शहीद का परिवार दून के डिफेंस कॉलोनी में बस गया। तब उनकी पत्नी सरला देवी ने सैनिक कल्याण बोर्ड समेत अन्य एजेसियों को यह जानकारी दी। सभी जगह रिकॉर्ड अपडेट कराने के बावजूद उन्हें दून में शहीदों की गिनती में नहीं रखा गया। 

लिहाजा शौर्य दिवस जैसे आयोजनों में उन्हें आमंत्रित नहीं किया जाता। सरला देवी ने बताया कि वह हर साल बोर्ड से ऐसे आयोजन में शामिल करने और शहीद को सम्मान देने का अनुरोध करती हैं, लेकिन उन्हें टाल दिया जाता है। इस वर्ष भी उन्हें किसी आयोजन में नहीं बुलाया गया है।

रणजीत सिंह जब शहीद हुए तब उनकी इकलौती बेटी मां के गर्भ में थी। जून में पिता शहीद हुए और नवंबर में बेटी का जन्म हुआ। बेटी प्रीति बिष्ट ने इसी वर्ष 12वीं पास की है। अपने पिता को न देख पाने का उसे बेहद दुख है। मां सरला देवी ने बताया कि वह अक्सर अपने पिता की तस्वीर को देखकर रोती रहती है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed