फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   state champion

सिस्टम के शिकंजे में असाधारण खेल प्रतिभा

Mon, 18 Nov 2013 10:07 PM IST
विनय बहुगुणा/अमर उजाला, कर्णप्रयाग
विनय बहुगुणा/अमर उजाला, कर्णप्रयाग Updated Mon, 18 Nov 2013 10:07 PM IST
विज्ञापन
state champion

मजदूर की बेटी रूपा ने हरिद्वार में एक दिन पहले ही फर्राटा दौड़ की स्टेट चैंपियनशिप जीती है। रूपा की करिश्माई प्रतिभा देखिए कभी भी वह दौड़ का अभ्यास नहीं करती। बस, प्रतियोगिता वाले दिन मजबूत इरादे उसके पांवों में पंख लगा देते हैं। सोचिए, ऐसी असाधारण खेल प्रतिभा को अगर ढंग का शिक्षण-प्रशिक्षण मिले तो वह राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय फलक पर क्या कुछ नहीं कर सकती।

विज्ञापन


डीएम ने दिखाई लाचारी
सिस्टम का हाल देखिए। डीएम लाचारी दिखाते हैं कि प्रशासन रूपा की मदद नहीं कर सकता। खेल अधिकारी का बयान प्रतिभाओं को अपनी अजगरी लपेट में लेने वाले सिस्टम का आईना है जो कहते हैं कि रूपा के लिए प्रशिक्षण और रहने-सहने का इंतजाम तो हो सकता है पर उसके लिए दो बार की स्टेट चैंपियन को ट्रायल देना पड़ेगा। जूनियर हाईस्कूल भकुंडा की कक्षा आठ की छात्रा रूपा दो साल से फर्राटा दौड़ की राज्य चैंपियनशिप जीत रही है। इस साल जीत के तमगे ने सिर्फ पांच सौ रुपये दिलाए हैं। उसका सपना राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पीटी ऊषा की मानिंद ट्रैक पर फर्राटा भरने की है। लेकिन इस सपने की ताबीर की राह में बड़े रोड़े हैं।
विज्ञापन


एक गिलास दूध पिलाने तक को पैसे नहीं
नेपाली मूल के रूपा के पिता दीपक की माली हालत ऐसी है कि उसके लिए एक गिलास दूध तक का इंतजाम नहीं कर सकते। ऐसे में उसे राष्ट्रीय स्तर का धावक बनाने के लिए अंडे, काजू, बादाम मुहैया कराने की तो सोची भी नहीं जा सकती। पिछले साल विद्यालय के शिक्षक अवतार सिंह रावत ने उसे दौड़ के लिए जूते और ट्रैक सूट खरीद कर दिया था। इसे खालिस प्रतिभा और दृढ़ संकल्प का कमाल ही कहिए कि उसने राज्य स्तरीय फर्राटा दौड़ की चैंपियनशिप पर अपने नाम की मुहर लगा दी। इसके अलावा उसे किसी ने कोई मदद नहीं की है।
विज्ञापन
विज्ञापन


हम नेपाली मजदूरों को कौन जानता है। हमारी बेटी ने हमें पूरे उत्तराखंड में जो सम्मान दिलाया, हम उसके आजीवन  ऋणी रहेंगे। बेटी की तरक्की के लिए निरंतर प्रयास करते रहेंगे। आगे ईश्वर को जो मंजूर होगा। - दीपक और अमृता/ रूपा के पिता-माता


खेल विभाग छात्रा के लिए शिक्षण सत्र 2014/15 से प्रशिक्षण के साथ रहने, खाने की मदद कर सकता है। इसके लिए छात्रा का पहले ट्रायल लिया जाएगा। -दिनेश असवाल जिला खेल अधिकारी चमोली

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed