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दुर्गम और सुगम स्कूलों में कोटिकरण के मानक बदलने की तैयारी

Wed, 19 Jul 2017 02:41 PM IST
अनिल चन्दोला/ अमर उजाला, देहरादून
अनिल चन्दोला/ अमर उजाला, देहरादून Updated Wed, 19 Jul 2017 02:41 PM IST
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standard of government school will change soon
arvind pandey

उत्तराखंड में दुर्गम और सुगम स्कूलों में कोटिकरण के मानक बदलने की तैयारी है। मौजूदा मानकों और उपमानकों में बदलाव की कवायद शुरू हो गई है।

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इसके लिए विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों की टीम तैयार की जा रही है। यह टीम नए मानकों और उपमानकों के आधार पर स्कूलों काकोटिकरण करेगी। शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय ने इसकी पुष्टि की है। 
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मौजूदा सरकार ने अनुरोध के आधार पर तबादलों की प्रक्रिया शुरू कर कुछ दिन पूर्व एकाएक ब्रेक लगा दिए। शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय ने इसके पीछे कुछ शिक्षकों के फर्जी प्रमाण पत्र तैयार कर आवेदन करने का कारण बताया। लेकिन सूत्रों के अनुसार कोटिकरण की विसंगतियों की शिकायतों के बाद शिक्षा मंत्री को प्रक्रिया पर रोक लगाने को मजबूर होना पड़ा था।
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उन्हें बताया गया कि जगह-जगह स्कूलों का कोटिकरण मनमाने ढंग से किया गया है। इसके चलते जहां दुर्गम के शिक्षकों को वर्षों बाद भी लाभ नहीं मिल पाया, वहीं सुगम के कई शिक्षकों ने आठ से दस वर्ष में ही तीन से चार बाद मनचाहे तबादले करवा लिए। विभागीय अधिकारियों से बातचीत में कोटिकरण की विसंगितयों की पुष्टि हुई। जिसके बाद शिक्षा मंत्री के स्तर से कोटिकरण में सुधार की पहल की गई है। 

नए कोटिकरण से होंगे तबादले
प्रदेश में शिक्षकों के तबादले अब नए कोटिकरण के आधार पर ही होंगे। सूत्रों के अनुसार सरकार स्कूलों का जल्द नए सिरे से कोटिकरण करना चाहती है। जिसके बाद शिक्षकों के तबादले किए जाएंगे। इसमें पांच से छह माह का समय लग सकता है। शिक्षा मंत्री भी इस सत्र में तबादला न होने की बात कह चुके हैं। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि अगले सत्र में नए कोटिकरण के आधार पर ही शिक्षकों के तबादले होंगे। 

आसान होगा मूल्यांकन
मौजूदा कोटिकरण 10 मानकों और 78 उपमानकों के आधार पर किया गया है। इसमें एक्स और वाई दो श्रेणियां बनाकर तीन-तीन उप श्रेणियां बनाई गई है। इसमें मूल्यांकन की प्रक्रिया खासी जटिल है। नए कोटिकरण को आसान और सुलझा हुआ बनाने की कोशिश की जा रही है। 


दुर्गम में शिक्षक ज्यादा
हरिद्वार के नारसन ब्लॉक में दुर्गम में शिक्षकों की संख्या खासी अधिक है। जबकि ब्लॉक का ज्यादातर हिस्सा सुगम ही है। ब्लॉक के सुगम में 5554 हजार बच्चों पर 99 टीचर हैं। वहीं दुर्गम में 6478 हजार बच्चों पर 291 शिक्षक कार्यरत हैं। 

कोटिकरण की विसंगतियों के कारण वास्तविक पात्र शिक्षकों को लाभ नहीं मिल पाया है। इसके कारण पहाड़ शिक्षक विहीन हो गए हैं। हर कोई दून, हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर जाना चाहता है। अब कोटिकरण ठीक होगा तो शिक्षकों का वितरण भी ठीक हो सकेगा। कोटिकरण ठीक होने के बाद ही तबादले होंगे। 
- अरविंद पांडेय, शिक्षा मंत्री

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