श्रीनगर हाइड्रो प्रोजेक्ट: रात भर चली बिजली की कवायद
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बृहस्पतिवार की रात श्रीनगर जल विद्युत परियोजना से बिजली उत्पादन शुरू करने की तैयारियां जोर-शोर से चल रही थीं। परियोजना प्रबंधन से मिली जानकारी के अनुसार रात 12 बजे के आसपास बिजली उत्पादन शुरू होने की संभावना थी।
लेकिन देर रात लगभग तीन बजे बिजली उत्पादन का काम शुरू हुआ। जो तड़के पांच बजे किसी वजह से बंद हो गया। फिलहाल इंजीनियर सिंक्रनाइजेशन के कार्य में लगे हुए हैं।
प्रथम चरण में परियोजना की एक टरबाइन से 82.5 मेगावाट बिजली मिलने लगेगी। एएचपीसीएल (अलकनंदा हाइड्रो पॉवर कंपनी लिमिटेड) और बीएचईएल (भारत हेवी इलेक्ट्रानिक्स लिमिटेड) के अभियंताओं के साथ मशीनों की मानिटरिंग कर रहे थे। इस मौके पर प्रबंध निदेशक (एमडी) कृष्णा भोपाल भी पहुंच गए हैं।
अलकनंदा नदी 330 मेगावाट की जल विद्युत परियोजना का निर्माण किया जा रहा है। इससे ज़ुलाई 2014 से ही विद्युत उत्पादन शुरू होना था। तब डि-सिल्टेशन बेसिन (गाद को अलग करने के लिए जलाशय) की दीवारों के ढहने से यह समय आगे बढ़ गया।
अभी एक ही टरबाइन से बनेगी बिजली
मरम्मत निपटने के बाद कंपनी ने कुछ दिन नहर का परीक्षण किया। एक अप्रैल से 82.5 मेगावाट की पहली नंबर की टरबाइन की चार्जिंग और टेस्टिंग की गई।
इस टरबाइन का 72 घंटे तक सफल परीक्षण करने के बाद चार अप्रैल की मध्य रात्रि 12 बजे से 82.5 मेगावाट की तीसरी टरबाइन का परीक्षण किया गया।
टरबाइनों के सफल परीक्षण के बाद इंजीनियर सिंक्रोनाइज कर रहे हैं। इसके बाद देर रात विद्युत उत्पादन शुरू कर इसे ग्रिड से जोड़ दिया जाएगा।
नहर में पानी कम होने से फिलहाल एक ही टरबाइन से विद्युत उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। नहर का लेबल बढ़ने पर दूसरी टरबाइन से भी उत्पादन शुरू किया जाएगा।
पाइप के जोड़ में लीकेज
परियोजना की प्रथम और द्वितीय टरबाइन की सफल टेस्टिंग और चार्जिंग के बाद दूसरी टरबाइन का परीक्षण किया जा रहा था। बताया जा रहा है इसमें नमी आने से मशीन जरूरी तापमान नहीं ले पाई। सूत्रों के अनुसार, बृहस्पतिवार शाम को चौथी टरबाइन का परीक्षण के दौरान एक पाइप के जोड़ से लीकेज होने लगा।
सिर्फ 12 प्रतिशत रायल्टी का ही फायदा
श्रीनगर जल विद्युत परियोजना से मिलने वाली बिजली से केवल 12 प्रतिशत रायल्टी का ही प्रदेश को फायदा है। बिजली नेशनल ग्रिड में सप्लाई होती है। लिहाजा प्रदेश की ऊर्जा क्षमता पर इसका कोई प्रभाव नही है। ऊर्जा सचिव उमाकांत पंवार के मुताबिक प्रदेश को बाहर से बिजली भी खरीदनी पड़ती है।
12 प्रतिशत की रायल्टी मिलने से इस खरीद में लगने वाले पैसे की बहुत हद तक भरपाई हो सकती है। बिजली की पूर्ति की दिशा में इस उत्पादन से प्रदेश की आपूर्ति में कोई अंतर नहीं पड़ेगा।
बाल-बाल बची गाय
नहर के बाइपास गेट (स्पिल वे) से अचानक पानी छोड़ने से एक गाय पानी में फंस गई। घटनाक्रम के अनुसार, बृहस्पतिवार शाम टरबाइनों की टेस्टिंग चल रही थी।
इसी दौरान एक गाय यहां से टरबाइन की दिशा में नदी के निकट आ गई। जब गाय लौटने लगी, तो उसी दौरान बाइपास गेट से पानी छोड़ दिया गया। ऐसे में गाय लौट नहीं पाई। घबराई हुई गाय पानी में बहते हुए बाल-बाल बची।