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पुलिस के इस हथियार से नहीं बच पाएंगे अपराधी

Sat, 05 Apr 2014 11:39 AM IST
राकेश शर्मा/अमर उजाला, देहरादून
राकेश शर्मा/अमर उजाला, देहरादून Updated Sat, 05 Apr 2014 11:39 AM IST
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special task force cyber lab in dehradun

अपराधी वारदात के बाद साक्ष्यों को इस तरह छुपाने की कोशिश करते हैं कि जांच के दौरान पुलिस के लिए सुरागों की कड़ियां जोड़ना कई बार मुश्किल हो जाता है।

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मामला साइबर क्राइम से जुड़ा हो तो और पेचीदगी बढ़ जाती है। इसे देखते हुए स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) साइबर लैब तैयार कर रही है।

इस महीने के अंत तक हो जाएगी शुरुआत

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तीन करोड़ की लागत से बनने वाली इस लैब में प्रदेश के पांच जिले जोड़े जाएंगे। इस लैब में कंप्यूटर, मोबाइल से डिलीट किए गए साक्ष्य तो हासिल होंगे ही, मोबाइल लोकेशन और आईडी के जरिये अपराधियों को ट्रेस करने में भी चंद घंटे का वक्त लगेगा। सिविल पुलिस भी इस लैब का लाभ ले सकेगी।

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की तरह अब उत्तराखंड एसटीएफ और पुलिस भी साइबर और सर्विलांस के नवीनतम संसाधनों से लैस हो जाएगी। एसटीएफ आफिस में निर्माणाधीन साइबर लैब के इस माह अंत में काम शुरू करने की उम्मीद है।

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नहीं जाना पड़ेगा दिल्ली

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अब तक संगीन अपराधों में मोबाइल, फेसबुक से डिलीट किए जाने वाले संदेश अथवा दूसरे डाटा के लिए दिल्ली पुलिस की तरफ झांकना पड़ता है।

इस काम में एक से तीन माह का समय लग जाता था, लेकिन अब महीनों का काम घंटों में हो जाएगा। पहले चरण में देहरादून के अलावा हरिद्वार, हल्द्वानी, ऊधमसिंह नगर और नैनीताल को सीधे जोड़ा जाएगा, लेकिन पूरा कंट्रोल एसटीएफ ऑफिस से ही संचालित होगा। इन जिलों की पुलिस संगीन अपराधों से जूझ रही है।

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यहीं होगी डीएनए जांच

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साइबर लैब के साथ एसटीएफ फोरेंसिक लैब भी बना रही है। इस लैब में साक्ष्यों की वैज्ञानिक जांच के साथ डीएनए जांच की भी सुविधा उपलब्ध होगी। अभी डीएनए सैंपल जांच के लिए हैदराबाद भेजे जाते हैं, जिसमें लंबा वक्त लग जाता है।

साइबर और फोरेंसिक लैब अप्रैल में तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। इस लिहाज से युद्ध स्तर पर काम चल रहा है। लैब बनने के बाद अपराधों पर लगाम कसने में मदद मिलेगी।
-सेंथिल अबूदेई एस कृष्णराज, एसएसपी, एसटीएफ

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