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उलझी उत्तराखंड की गुत्थी, स्पीकर बन सकते हैं राह में रोड़ा

Tue, 22 Mar 2016 08:38 AM IST
हिमांशु मिश्र/अमर उजाला, नई दिल्ली
हिमांशु मिश्र/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Tue, 22 Mar 2016 08:38 AM IST
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speaker govind singh kunjwal may be problem for BJP.
भाजपा प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति से मुलाकात कर प्रदेश के हालात से अवगत कराया है। - फोटो : AmarUjala
भाजपा और कांग्रेस के दावे-प्रतिदावे ने उत्तराखंड के सियासी संकट की गुत्थी उलझा दी है। विधानसभा स्पीकर को हटाने का फिलहाल कोई रास्ता न होने ने जहां भाजपा की परेशानी बढ़ाई है, वहीं बागी विधायक के भविष्य को लेकर भी संकट खड़ा हो गया है। सरकार फिलहाल राज्यपाल की ओर से भेजी गई रिपोर्ट का अध्ययन कर रही है।
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चूंकि रिपोर्ट में राज्य सरकार के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश के बदले विवाद वाले दिन की विधानसभा की कार्यवाही की सीडी ही है, इसलिए राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने का आधार भी नहीं बन पा रहा।
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केंद्र को अब किसी प्रकार का निर्णय लेने के लिए रावत सरकार के शक्ति परीक्षण के दिन तक का इंतजार करना होगा। फिलहाल भाजपा की कोशिश अब शक्ति परीक्षण में किसी भी तरह कांग्रेस को विधानसभा में पटखनी देने की है।
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बागियों की सदस्यता रद्द हुई तो भाजपा को होगी मुश्किल

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बागी विधायक गुड़गांव में डेरा डाले हुए हैं। - फोटो : AmarUjala

पार्टी सूत्रों ने बताया कि नेतृत्व महज नौ विधायकों की बगावत से असमंजस में है। पार्टी को डर है कि कहीं स्पीकर इन विधायकों की सदस्यता खत्म न कर दे। अगर ऐसा होता है कि कांग्रेस यूकेडी, बसपा और निर्दलीय विधायकों को साध कर विधानसभा में बहुमत साबित कर सकती है।

ऐसे में बागी विधायक स्पीकर के खिलाफ हालांकि अदालत का दरवाजा खटखटा सकते हैं, मगर इससे भाजपा का उद्देश्य पूरा नहीं होगा।

दरअसल पार्टी पहले स्पीकर के खिलाफ कार्रवाई चाहती थी। मगर राज्यपाल के रुख ने उसकी परेशानी बढ़ा दी। अब नई परिस्थिति में भाजपा को स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाना होगा। मुश्किल यह है कि इस प्रस्ताव के लिए 14 दिन पहले नोटिस देना पड़ता है।

सियासी भविष्य पर संविधान विशेषज्ञ की राय

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कैलाश विजयवर्गीय - फोटो : AmarUjala

संविधान विशेषज्ञ सुभाष कश्यप का कहना है कि न तो तत्काल स्पीकर को हटाया जा सकता है और न ही स्पीकर तुरंत प्रभाव से बागी विधायकों की सदस्यता ही खत्म कर सकते हैं।

अविश्वास प्रस्ताव के नोटिस पर चर्चा के लिए 14 दिन का समय लिया जा सकता है। बकौल कश्यप बागी विधायक नोटिस का जवाब देने के लिए समय मांग सकते हैं और स्पीकर समय देने के लिए बाध्य भी हैं। समय देने के बदले अगर स्पीकर विधायकों को निष्कासित करते हैं तो इन्हें अदालत का स्टे मिल सकता है।

कश्यप के अनुसार हालांकि केंद्र को राज्यपाल से राष्ट्रपति शासन की सिफारिश न मिलने के बाद भी सरकार को बर्खास्त करने का हक है। मगर यह उसी स्थिति में हो सकता है जब राज्य में सभी तरह की मशीनरी फेल हो जाए।

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