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शर्मनाक: पिता की लाश के लिए पांच घंटे तक भटकता रहा बेटा

Sat, 01 Oct 2016 06:09 PM IST
नलिनी गुसाईं/अमर उजाला, देहरादून
नलिनी गुसाईं/अमर उजाला, देहरादून Updated Sat, 01 Oct 2016 06:09 PM IST
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son got father's dead body after five hours.
कलेक्ट्रेट में डीएम के इंतजार में बैठे अमर सिंह और राजेंद्र - फोटो : AmarUjala

इसे सिस्टम की संवेदनहीनता कहें या नियमों का मकड़जाल जिनके फेर में एक बेटा अपने पिता का शव पाने के लिए पांच घंटे तक एक दफ्तर से दूसरे दफ्तर तक भटकता रहा। दरअसल मिर्गी के दौरे के बाद सड़क पर गिरने से बृहस्पतिवार को उसके पिता की मौत हो गई थी। पुलिस शव का पोस्टमार्टम कराना चाहती थी, जबकि बेटा अंतिम संस्कार के लिए पिता के शव को करीब 575 किलोमीटर दूर उन्नाव ले जाना चाहता था।

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बिना पोस्टमार्टम शव सौंपने की अनुमति के लिए बेटा दफ्तरों के चक्कर काटता रहा। वहीं, पुलिस प्रशासन की अनुमति मांगती रही तो प्रशासन पुलिस की रिपोर्ट। करीब पांच घंटे की भागदौड़ के बाद नियमों की उलझन सुलझ पाई।
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शुक्रवार को प्रेमनगर निवासी अमर सिंह अपने फूफा राजेंद्र के साथ जिला प्रशासन में परेशान घूम रहा था। कभी वह एडीएम के कक्ष तो कभी जिलाधिकारी के पर्सनल ऑफिसर (पीओ) के कक्ष में जाकर मदद की गुहार लगाता। अमर उजाला संवाददाता ने उससे परेशानी पूछी तो उसके आंसू छलक पड़े। उसने बताया कि वह मजदूरी कर के घर चलाता है।

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अस्पताल ने दे दी अनुमति, पुलिस ने कहा पोस्टमार्ट कराओ

son got father's dead body after five hours.
शव

पिता राम बाबू बृहस्पतिवार को घर से निकले थे। रास्ते में मिर्गी के दौरे की वजह से वह गिर पड़े। कुछ लोगों ने उन्हें सरकारी अस्पताल पहुंचा दिया, जहां उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। अमर सिंह ने बताया कि वह पिता को रातभर ढूंढते रहे। शुक्रवार सुबह सात बजे जानकारी मिली तो अस्पताल पहुंचे।

अस्पताल ने तो शव को ले जाने की अनुमति दे दी, लेकिन पुलिस ने पहले पोस्टमार्टम कराने का कहा। बताया गया कि पोस्टमार्टम के बिना शव ले जाने के लिए डीएम की अनुमति जरूरी है। जिला प्रशासन में डीएम तो नहीं मिले लेकिन उनके पर्सनल ऑफिसर ने संबंधित थाने से रिपोर्ट लाने का कहा। इसके बाद वे लोग थाने पहुंचे और रिपोर्ट लेकर दोबारा डीएम कार्यालय आए।

थाने की रिपोर्ट के बाद डीएम कार्यालय से अनुमति दी गई। इस अनुमति के साथ वे लोग फिर थाने पहुंचे। इसके बाद ही उन्हें बिना पोस्टमार्टम शव ले जाने की अनुमति मिल पाई।

शव न खराब हो इसलिए चाहते थे जल्द परमिशन

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मौत

राजेंद्र ने बताया कि वे राम बाबू का अंतिम संस्कार उन्नाव में उनके पैतृक गांव में करना चाहते थे। शव खराब न हो इसके लिए उन्हें जल्द अनुमति की जरूरत थी, लेकिन उन्हें कई घंटे चक्कर काटने पड़े। 

पुलिस ने परिजनों को बिना रिपोर्ट प्रशासन में भेज दिया था। पुलिस रिपोर्ट के बिना परमिशन नहीं दी जा सकती। यही वजह थी कि पुलिस रिपोर्ट के लिए उन्हें वापस थाने भेजा गया। रिपोर्ट मिलने के बाद दोपहर तीन बजे परिजनों को अनुमति दे दी गई थी।
-रविनाथ रमन, डीएम

पुलिस के यहां से सीधे रिपोर्ट लगाकर नहीं दे दी जाती है। पहले आवेदनकर्ता को स्वयं डीएम कार्यालय में एप्लीकेशन देनी होती है। जब डीएम के यहां से मार्क किया जाता है, उसके बाद ही पुलिस की ओर से रिपोर्ट लगाई जाती है।
-एसएस बिष्ट, थानाध्यक्ष, प्रेमनगर

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