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उत्तराखंड के जन नेता डॉ. शमशेर सिंह बिष्ट नहीं रहे, कई आंदोलनों में निभाई थी सक्रिय भूमिका

Sun, 23 Sep 2018 11:42 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अल्मोड़ा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अल्मोड़ा Updated Sun, 23 Sep 2018 11:42 AM IST
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social worker shamsher singh bisht death
shamsher singh bisht - फोटो : file photo

चिपको आंदोलन, नशा नहीं, रोजगार दो और राज्य आंदोलन सहित उत्तराखंड के तमाम जनसंघर्षों में सक्रिय रहे जाने माने सामाजिक कार्यकर्ता, वरिष्ठ पत्रकार और उत्तराखंड लोक वाहिनी (उलोवा) के केंद्रीय अध्यक्ष डॉ. शमशेर सिंह बिष्ट का 71 वर्ष की आयु में निधन हो गया। डॉ. बिष्ट काफी समय से बीमार थे।

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शनिवार तड़के चार बजे उन्होंने घर पर अंतिम सांस ली। परिजन उन्हें शनिवार को दिल्ली ले जाने वाले थे। दोपहर बाद विश्वनाथ घाट में उनकी अंत्येष्टि कर दी गई। उनके बेटों ने उनकी चिता को मुखाग्नि दी। उन्हें अंतिम विदाई देने के लिए लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा था। डॉ. बिष्ट के परिवार में पत्नी रेवती बिष्ट, दो बेटे जयमित्र बिष्ट और अजय बिष्ट हैं। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट समेत तमाम लोगों ने डॉ. बिष्ट के निधन पर शोक व्यक्त किया है।
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डॉ. शमशेर सिंह बिष्ट का जन्म 4 फरवरी 1947 को अल्मोड़ा में हुआ था। मूल रूप से स्याल्दे ब्लॉक के तिमली गांव निवासी डॉ. शमशेर सिंह के पिता स्व. गोविंद अल्मोड़ा कचहरी में कार्य करते थे। डॉ. बिष्ट का जन्म भी अल्मोड़ा में ही हुआ। इंटरमीडिएट पास करने के बाद उन्होंने तत्कालीन संघटक महाविद्यालय अल्मोड़ा में प्रवेश लिया और छात्र राजनीति में सक्रिय हो गए। 1972 में वह अल्मोड़ा संघटक महाविद्यालय के छात्रसंघ अध्यक्ष बने और उन्होंने पहली बार छात्रों की समस्याओं के साथ ही राज्य और उत्तराखंड के मुद्दों को लेकर संघर्ष की शुरुआत की। डॉ. शमशेर सिंह बिष्ट ने चिपको, विश्वविद्यालय, वन बचाओ, नशा नहीं-रोजगार दो, नदी बचाओ और उत्तराखंड राज्य आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई थी। 
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40 दिन तक जेल में भी रहे डॉ. बिष्ट

नशा नहीं, रोजगार दो आंदोलन में वह अपने साथियों के साथ 40 दिन तक जेल में रहे। राज्य के कई अन्य आंदोलनों के दौरान भी वह कई बार गिरफ्तार हुए। उन्होंने 1974 में अपने तीन अन्य साथियों के साथ अस्कोट से आराकोट तक 45 दिन की यात्रा की।

1977 में उत्तराखंड जन संघर्ष वाहिनी के गठन के बाद डॉ. बिष्ट और कुछ अन्य नेताओं के नेतृत्व में वनों को बचाने के लिए जबरदस्त आंदोलन हुआ। उत्तराखंड के अलावा देश में मानवाधिकार, पर्यावरण, नदियों आदि के मुद्दों को लेकर भी वह देश के विभिन्न इलाकों में आयोजित सम्मेलनों और जागरूकता कार्यक्रमों में हिस्सा लेते रहे। 

अंतिम विदाई देने ये भी पहुंचे
डा. शमशेर सिंह की अंतिम विदाई देने के लिए केंद्रीय कपड़ा राज्यमंत्री अजय टम्टा, राज्यसभा सांसद प्रदीप टम्टा, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल सहित राज्य भर से तमाम सामाजिक संगठनों से जुड़े कार्यकर्ता, पत्रकार और कई अन्य बुद्धिजीवी मौजूद थे। उनके निधन पर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, केंद्रीय कपड़ा राज्यमंत्री अजय टम्टा, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट,  विधानसभा उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह चौहान, जाने माने इतिहासकार प्रो. शेखर पाठक, वरिष्ठ पत्रकार राजीव लोचन साह, उपपा के केंद्रीय अध्यक्ष पीसी तिवारी, अल्मोड़ा के जिलाधिकारी नितिन भदौरिया सहित तमाम जन प्रतिनिधियों और संगठनों ने गहरा शोक व्यक्त किया है।

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