उत्तराखंड: केदारनाथ और बदरीनाथ की चोटियों पर हिमपात, ठंड का प्रकोप बढ़ा, अगले 24 घंटे भारी
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उत्तराखंड के मैदानी इलाकों के साथ ही पहाड़ में दूसरे दिन रविवार को भी मौसम खराब रहा। रुक-रुक कर बारिश का सिलसिला जारी रहा। बदरीनाथ, केदारनाथ और हेमकुंड साहिब की ऊंची चोटियों पर हिमपात हुआ है।
चमोली जिले में निचले क्षेत्रों में बारिश और बदरीनाथ व हेमकुंड साहिब की चोटियों पर लगातार दूसरे दिन भी हिमपात होने से ठंड का प्रकोप बढ़ गया है। लोगों ने ठंड से बचने के लिए गर्म कपड़े निकाल दिए हैं। बदरीनाथ धाम में रविवार को भी दिनभर बारिश होती रही। पूर्वाह्न ग्यारह बजे ऊंची चोटियों पर करीब एक घंटे तक हिमपात हुआ। हेमकुंड साहिब के पास की चोटियों पर भी बर्फबारी हुई है।
रुद्रप्रयाग जिले में रविवार को भी बारिश का सिलसिला जारी रहा। केदारनाथ मंदिर के दोनों तरफ की पहाड़ियों पर हिमपात हो रहा है, जिससे केदारपुरी में ठंड बढ़ गई है। चौकी प्रभारी बिपिन चंद्र पाठक ने बताया कि मौसम के बिगड़े मिजाज के कारण केदारनाथ में रात्रि को तापमान 2 डिग्री पर पहुंच रहा है, जबकि दिन में 6 से 8 डिग्री सेल्सियस के बीच है।
24 घंटे में छह जिलों में भारी बारिश की चेतावनी
मौसम विभाग ने अगले 24 घंटे में प्रदेश के छह जिलों में भारी बारिश की चेतावनी दी है। इसके साथ ही सभी विभागों को सतर्क रहने और लोगों से सुरक्षित जगह पर रहने की अपील की गई है। वहीं रविवार को प्रदेशभर में बादल छाए रहे। प्रदेश के कई हिस्सों में जमकर बारिश हुई। राजधानी दून में दिनभर बूंदाबांदी का दौर रहा। मौसम विभाग के निदेशक बिक्रम सिंह ने बताया कि आगामी 24 घंटे में प्रदेश के छह जिलों देहरादून, उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़ और बागेश्वर में भारी बारिश के आसार हैं। सोमवार को प्रदेश के अधिकतर हिस्सों में बादल छाए रहेंगे। कई जगहों पर बहुत भारी बारिश भी हो सकती है। इसके तहत अलर्ट जारी किया गया है।
लिपुपास में तीन फुट बर्फ, तापमान गिरा
मौसम ने एक बार फिर करवट बदल ली है। कैलाश मानसरोवर यात्रा मार्ग के उच्च हिमालयी क्षेत्र लिपुपास, नाभीढांग और कालापानी में हिमपात जारी है। लिपुपास में करीब तीन फुट तक हिमपात हुआ है। यहां तापमान शून्य से नीचे पहुंच गया है। भारी बारिश के अलट को देखते हुए चंपावत जिला प्रशासन ने सोमवार को इंटर तक के सभी स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों में छुट्टी घोषित है।
आईटीबीपी सातवीं वाहिनी मिर्थी से मिली जानकारी के अनुसार मुनस्यारी के पंचाचूली, हंसलिंग और राजरंभा की चोटियां बर्फ से लकदक हो गईं हैं। सीमांत जिले के अन्य हिस्सों में दूसरे दिन भी बारिश हुई। क्षेत्रवासियों ने गर्म कपड़े निकाल लिए हैं। नाचनी में बारिश से धान, मडु़वा और भट की फसल के साथ ही सब्जियों को नुकसान हुआ है। 17वें और 18वें दल के कैलाश यात्री दूसरे दिन भी खराब मौसम के चलते गुंजी में ही रुके रहे। मलबा आने से चंपावत-टनकपुर हाईवे बंद हो गया। एनएच बंद होने से लोहाघाट डिपो से सिर्फ दो बसों का संचालन हुआ।
रविवार को देवीधुरा होते हुए देहरादून और दिल्ली के लिए एक-एक बसों का संचालन किया गया। बारिश से किरोड़ा और बाटनागाड़ नाले भी उफान पर आ गए नाचनी में बिर्थी झरने से करीब 500 मीटर ऊपर बनी पैदल पुलिया रविवार सुबह तेज बारिश के दौरान गधेरे का जलस्तर बढ़ने से बह गई। पुल बहने से बिर्थी गांव के लेटवा तोक में रहने वाले लोगों के साथ ही खलियाटॉप ट्रैकिंग रूट पर भी आवाजाही ठप हो गई है।
भूस्खलन से लामबगड़ में बदरीनाथ हाईवे बंद
लामबगड़ और हनुमान चट्टी में चट्टान से भूस्खलन के कारण बदरीनाथ हाईवे अवरुद्घ हो गया है, जिससे बदरीनाथ जा रहे करीब 300 तीर्थयात्रियों को प्रशासन की ओर से गोविंदघाट, पांडुकेश्वर और जोशीमठ में रोक लिया गया है।
रविवार को सुबह से ही बारिश होने से करीब तीन बजे लामबगड़ में चट्टान से भारी मात्रा में मलबा और बोल्डर हाईवे पर आ गए, जिससे यहां वाहनों की आवाजाही रुक गई। करीब साढ़े तीन बजे हनुमान चट्टी में भी चट्टान से मलबा और बोल्डर छिटक कर हाईवे पर आ गए।
भारी बारिश के कारण मेकाफेरी कंपनी की जेसीबी मशीनें भी हाईवे को खोलने का काम शुरू नहीं कर पाई। मेकाफेरी कंपनी के इंजीनियर हिमांशु का कहना है कि सोमवार को मौसम सामान्य होने के बाद ही हाईवे को सुचारु किया जा सकता है। मौसम सामान्य रहने से करीब दो सप्ताह से लामबगड़ भूस्खलन क्षेत्र में यातायात सुचारु था, लेकिन दो दिनों से लगातार हो रही बारिश से यहां हाईवे फिर तंग हालत में पहुंच गया है।
कहीं बिजली तो कहीं फसल पर आंधी और बारिश का कहर
रुड़की में दो दिन से हो रही बारिश और आंधी कहर बिजली के साथ किसानों की फसलों पर भी टूटा है। रविवार को शहर से लेकर देहात क्षेत्रों में भी घंटों बिना बिजली के लोगों का बुरा हाल रहा। वहीं, तेज आंधी के साथ हुई बारिश के कारण धान और गन्ने की फसल धराशायी हो गई। धान की फसल गिरने के कारण किसानों को पैदावार कम की चिंता सताने लगी है।
शनिवार देर रात शुरू हुई बारिश ने जनजीवन अस्तव्यस्त कर दिया। देर रात करीब 12 बजे तेज आंधी के साथ बारिश से शहर के कई क्षेत्रों में बिजली गुल हो गई। ब्रह्मपुर, सोलानीपुरम आदि क्षेत्रों में आंधी के कारण चार घंटे तक आपूर्ति बाधित रही। कई अन्य इलाकों में भी आपूर्ति बाधित होने से लोग परेशान रहे। वहीं, देहात क्षेत्र बेड़पुर, नूर, काशीपुर समेत करीब आठ गांवों में भी घंटों लोगों को फजीहत झेलनी पड़ी। एसडीओ राजीव चक्रवर्ती का कहना है कि पेड़ गिरने के कारण आपूर्ति ठप हो गई थी, जिसे चालू करा दिया गया है। वहीं, आंधी ने धान की फसल को तहस-नहस कर दिया। आंधी के कारण धान की फसल धराशायी हो गई।
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि इन दिनों धान की फसल पकने वाली है। यदि इन दिनों में फसल गिर जाती है, तो पैदावार कम हो जाता है। वहीं, गन्ने की फसल को नुकसान पहुंचा है। मुख्य कृषि अधिकारी विकेश यादव ने बताया कि देहात क्षेत्रों में धान की फसल गिरने से नुकसान हुआ है। उन्होंने किसानों से जल्द नुकसान से संबंधित सूचना देने को कहा ताकि जिन लोगों ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत बीमा कराया है, उनकी फसलों का सर्वे कराकर क्लेम दिया जा सके। आंधी के साथ आई बारिश के कारण नारसन में भी गन्ने और धान की फसल गिर गई। किसान नेता विजय शास्त्री का कहना है कि सरकार ने तो किसानों से मुंह मोड़ लिया है, लेकिन कुदरत भी किसानों पर कहर बरपा रहा है। इससे किसान भुखमरी की कगार पर आ गया है। उन्होंने अधिकारियों से अनुरोध है कि फसलों के नुकसान का मुआवजा दिया जाए।
खानपुर के एक दर्जन गांव की आपूर्ति बाधित
तेज हवाओं और बारिश के चलते क्षेत्र के दो दर्जन गांवों प्रह्लादपुर, शाहपुर, आलमपुरा, हस्तमौली, मदारपुर, धर्मपुर, सहीपुर, अब्दीपुर, सिकंदरपुर कलां, सिकंदरपुर खुर्द, भारूवाला, ब्राह्मणवाला, बालचंदवाला, मोहनावाला, डेरियो, बादशाहपुर, खानपुर, तुगलपुर, माडाबेला, शेरपुर बेला, चंदपुरी कलां, चंदपुरी खुर्द, नाईवाला, दल्लावाला, दाबकी खेड़ा, मोहनावाला डेरा, जोगावाला, इदरीशपुर की विद्युत आपूर्ति ठप हो गई। जेई अक्षय कुमार का कहना है कि रातभर चली तेज हवाओं के चलते विद्युत लाइनें क्षतिग्रस्त हो गईं। हालांकि, रविवार शाम तक विद्युत लाइनों को दुरुस्त कर आपूर्ति सुचारु कर दी गई। दूसरी ओर आंधी के कारण खड़ी फसल धराशायी हो गई। किसान कुशलपाल, मदन राठी, ईलम चंद, सुखबीर, महिपाल आदि का कहना है कि मई जून में गर्मी और बाढ़ ने उनकी फसलें तबाह कर दीं। अब रही सही कसर आंधी और बारिश ने पूरी कर दी है।