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जल 'प्रलय' आने से पहले मोबाइल पर आएगा SMS
ब्यूरो / अमर उजाला, रुड़की
Updated Tue, 27 Oct 2015 03:12 PM IST
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अब उत्तराखंड में जल प्रलय जैसी आपदा से बचाने के लिए हर घर को ही नहीं बल्कि पहाड़ों की यात्रा पर आए सैलानियों को भी चार से पांच घंटे पहले चेतावनी जारी की जा सकेगी।
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आईआईटी वैज्ञानिकों ने केदारनाथ में 2012 में आई जल प्रलय पर अध्ययन कर सेंसर नेटवर्क आधारित ‘वेब बेस्ड इनफारमेशन सिस्टम’ तैयार किया है। जिसके जरिए मोबाइल पर एसएमएस से पूर्व चेतावनी जारी की सकेगी। सोमवार को आईआईटी पहुंची केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने जब इस तकनीक को जाना तो वह भी अचंभित रह गई और उन्होंने इस तकनीक को देश में लागू कराने की मंशा जताई।
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आईआईटी वैज्ञानिक डॉ. कमल जैन और शोधार्थी गोविंद विल्लूरी, अनुज तिवारी व सुरेश एम ने केदारनाथ से उत्तरकाशी के बीच 15 गांवों के 430 भवनों का सर्वे करने के बाद नेटवर्क सेंसर आधारित ‘वेब बेस्ड इनफारमेशन सिस्टम’ विकसित किया है। इस सिस्टम में रिमोट सेंसिंग और जीआईएस तकनीक से भारी बारिश और बादल फटने से पड़ने वाले प्रभावों का आकलन किया गया है।
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जिसके बाद इलेक्ट्रो मैकेनिकल सेंसर के जरिए इनफारमेशन सिस्टम तैयार किया। स्वचालित तकनीक आधारित इस सिस्टम से इंटरनेट के जरिए संबंधित क्षेत्र के प्रत्येक घर को आपदा से चार-पांच घंटे पूर्व मोबाइल पर एसएमएस के जरिए चेतावनी जारी की जा सकेगी।
यही नहीं रजिस्ट्रेशन कराने के बाद पहाड़ों पर जाने वाले सैलानियों को पूर्व चेतावनी जारी हो जाएगी। इसके लिए टूरिस्ट को निर्धारित वेबसाइट पर आनलाइन रजिस्ट्रेशन कराना होगा।
शोध अध्ययन में जल प्रलय के समय खतरे की जद में 39 भवनों को हाई रिस्क और 346 भवनों को सामान्य रिस्क जोन श्रेणी में दर्शाया गया है। आईआईटी पहुंची उमा भारती के सामने वैज्ञानिकों ने जब इस तकनीक का प्रस्तुतीकरण किया तो उन्होंने इसे पूरे देश में लागू कराए जाने की मंशा व्यक्त की।
खतरे के हिसाब से होंगे एसएमएस
जल प्रलय के दौरान खतरे के लिहाज से हर घर की स्थिति अलग-अलग होती है। इसी को ध्यान में रखते हुए तैयार तकनीक में किसी भी क्षेत्र के प्रत्येक घर को एक विशेष नंबर अलाट किया जाएगा।
मैथेमेटिक मॉडलिंग के जरिए हर घर के लिए यह मानक तय किया जाता है कि किस घर पर कितने एमएम बारिश होने पर उसके टूटने या बहने का खतरा होगा। इसी खतरे को भांपते हुए हर घर को एसएसएम जारी किया जाएगा।